चतरा: टंडवा-पिपरवार मुख्य सड़क पर कोयला और ऐश पौंड की ढुलाई में लगे भारी वाहनों का परिचालन अब आम लोगों की जान पर भारी पड़ने लगा है। गुरुवार देर शाम कल्याणपुर के समीप ट्रेलर की चपेट में आने से 19 वर्षीय झिमी कुमारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 18 वर्षीय अंजली कुमारी गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर किया गया है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क पर दौड़ रहे भारी वाहनों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरोप है कि कोयला ढुलाई में लगी GTPL और ऐश पौंड को एनटीपीसी से गुमला तक पहुंचाने में लगी मैसिव मिनरल कंपनी के ट्रेलरों के कारण क्षेत्र की सार्वजनिक सड़कों पर लगातार खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में आम राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों की जान जोखिम में पड़ रही है।
एक मौत के बाद कंपनियों से मुआवजे की मांग
हादसे के बाद क्षेत्र में आक्रोश है। गरीबों की आवाज के रूप में चर्चित गोरी देवी ने मृतका झिमी कुमारी के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने और घायल अंजली समेत अन्य घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की मांग की है। उन्होंने कोयला और ऐश पौंड ढुलाई में लगी कंपनियों को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर भारी वाहनों का परिचालन नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
गोरी देवी के अनुसार, एनटीपीसी से ऐश पौंड की ढुलाई मैसिव मिनरल कंपनी के ट्रेलरों के जरिए गुमला तक की जा रही है। वहीं, कोयला परिवहन में जय नंदनी, GTPL और RKS ट्रांसपोर्ट कंपनियों के हाईवा और ट्रेलर क्षेत्र की सड़कों पर चल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों के लाइजनर क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं, लेकिन सड़क सुरक्षा और आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।
प्रशासनिक आदेश के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे ओवरलोड ट्रेलर…
सबसे गंभीर सवाल जिला प्रशासन के उस आदेश को लेकर उठ रहा है, जिसमें क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले ट्रेलरों के परिचालन पर रोक लगाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही जारी रहने का आरोप है। यदि आदेश के बाद भी नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर निगरानी की व्यवस्था प्रभावी है और क्या नियम तोड़ने वाले वाहनों के खिलाफ नियमित कार्रवाई हो रही है?
गोरी देवी ने प्रशासन से मांग की है कि दुर्घटना में मृत युवती के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए, घायलों के इलाज का पूरा खर्च संबंधित कंपनियां उठाएं और सार्वजनिक सड़कों पर नियम विरुद्ध कोयला एवं ऐश पौंड ढुलाई तत्काल रोकी जाए। उन्होंने दोषी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग की है।
आखिर कब थमेगा मौत का सिलसिला?
टंडवा-पिपरवार सड़क पर कोयला और ऐश पौंड परिवहन से जुड़ी कंपनियों के भारी वाहनों का परिचालन स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक ओर कंपनियों का परिवहन कारोबार जारी है, दूसरी ओर सड़क पर चलने वाले आम लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। झिमी कुमारी की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ मुआवजे का नहीं, बल्कि यह भी है कि सार्वजनिक सड़कों पर भारी वाहनों के परिचालन की जवाबदेही कौन तय करेगा? प्रशासन कब नियमों का सख्ती से पालन कराएगा, ताकि किसी दूसरे परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े?


