स्कूल प्रबंधन ने साधी चुप्पी, POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज
पढ़ें पुलिसिया ढिलाई और कानूनी एंगल
राजधानी रांची के कांके चंदवे स्थित ‘इंडियन पब्लिक स्कूल’ के भीतर क्लास 5 में पढ़ने वाले एक मासूम छात्र के साथ उसी स्कूल के क्लास 9 में पढ़ने वाले छात्र ने अप्राकृतिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया है। छात्र के साथ मारपीट की गयी, धमकाया गया और उसके बाद उसके कपड़े उतरवाकर उसके साथ अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया गया। करोड़ों की लागत से बनाए गए इस स्कूल में लाखों रुपये फी और बच्चों की सुरक्षा के नाम पर वसूले जाते हैं लेकिन स्कूल प्रबंधन की लापरवाही देखिए उन्होंने इस गंभीर घटना के बाद पुलिस को भी सूचित नहीं किया। पीड़ित बच्चे के परिवार को जानकारी मिलने के बाद मामले में केस दर्ज कर नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार किया गया। स्कूल का कहना है कि इंडियन पब्लिक स्कूल को अभी तक CBSE से मान्यता भी नहीं मिली है लेकिन स्कूल में CBSE कोर्स के अनुसार पढ़ाई करायी जा रही है। विदित हो कि इंडियन पब्लिक स्कूल एक CO-EDUCATION स्कूल है और यहां छात्र छात्राएं दोनों साथ पढ़ते हैं।
रोंगटे खड़ी करने वाली है घटना
पीड़ित बच्चा और नाबालिग आरोपी दोनों ही स्कूल परिसर में बने हॉस्टल में रहते हैं। स्कूल से रोंगटे खड़े कर देने वाली इस घटना के खुलासे के बाद स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और उनके अभिभावक सभी काफी डरे हुए हैं। कक्षा 5 में पढ़ने वाले एक 11 वर्षीय मासूम छात्र के साथ हॉस्टल के वॉशरूम में कक्षा 9 के 16 वर्षीय वरिष्ठ छात्र द्वारा कथित रूप से डरा-धमकाकर यौन उत्पीड़न की घटना 21 सितंबर 2026 की देर रात करीब 10:30 बजे की बताई जा रही है। इस मामले में पिठोरिया थाना में पॉक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 6/21 के तहत मामला (कांड संख्या 98/26) दर्ज कर लिया गया है। इस पूरी घटना ने न केवल बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि स्कूल प्रशासन की आपराधिक लापरवाही और शुरुआती पुलिसिया रुख को भी कटघरे में ला खड़ा किया है।
हॉस्टल की चहारदीवारी में दरिंदगी: पीड़ित छात्र की जुबानी
पीड़ित बालक के पिता जमशेदपुर के रहने वाले हैं। उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि 21 सितंबर की रात उनका 11 वर्षीय बेटा हॉस्टल के कमरे/वॉशरूम में था। इसी दौरान आरोपी वरिष्ठ छात्र ने उसे डराया-धमकाया, जबरन कपड़े उतरवाए और उसके साथ अनैतिक कृत्य किया। मामला तब उजागर हुआ जब 22 सितंबर को पीड़ित मासूम ने हिम्मत जुटाकर खुद फोन पर अपने परिजनों को आपबीती सुनाई। फोन पर बात करते हुए बच्चा बुरी तरह सहमा हुआ था और रो रहा था।
स्कूल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही: न गार्जियन को बताया, न पुलिस को दी खबर
इस घटना का सबसे शर्मनाक और गंभीर पहलू स्कूल एवं हॉस्टल प्रबंधन का रवैया रहा।
सूचना छिपाने का प्रयास: 21 सितंबर की रात घटी इतनी बड़ी घटना के बाद भी हॉस्टल वार्डन या स्कूल प्रशासन ने न तो पीड़ित छात्र के माता-पिता को सूचित किया और ना ही स्थानीय पिठोरिया थाना पुलिस को खबर दी।
पॉक्सो एक्ट की धारा 21 का सीधा उल्लंघन: POCSO Act की धारा 21 के तहत यदि किसी संस्थान (स्कूल/हॉस्टल) को बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न की जानकारी मिलती है या संदेह होता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को देना अनिवार्य है। ऐसा न करना अपने आप में एक गैर-जमानती अपराध है।
साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका: घटना के बाद कई घंटों तक मामले को दबाए रखने की कोशिश से हॉस्टल के CCTV फुटेज, उपस्थिति रजिस्टर और अन्य महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गंभीर आशंका पैदा हो गई है।
कानूनी एंगल: धारा 6 और धारा 21 (POCSO) का क्या है महत्व?
पिठोरिया थाने में दर्ज प्राथमिकी (Case No. 98/26) में मुख्य रूप से पॉक्सो एक्ट की धारा 6 और धारा 21 लगाई गई है।
धारा 6 POCSO (Aggravated Penetrative Sexual Assault): यह धारा गंभीर यौन हमले के मामलों में लागू होती है। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो इसमें न्यूनतम 20 वर्ष के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन के लिए) और जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 21 POCSO (Failure to Report): यह धारा स्कूल प्रबंधन, हॉस्टल इंचार्ज या किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति पर लागू होती है जो अपराध की जानकारी होने के बावजूद पुलिस को रिपोर्ट करने में विफल रहता है। इसमें 1 वर्ष तक की सजा या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
नाबालिग आरोपी पर क्या होगी कार्रवाई?
आरोपी छात्र की उम्र लगभग 16 वर्ष बताई जा रही है, इसलिए उस पर ‘बाल न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम’ (Juvenile Justice Act) के तहत कार्रवाई होगी। 16 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के नाबालिगों द्वारा किए गए जघन्य अपराधों (Heinous Offences) में जूवेनाइल जस्टिस बोर्ड (JJB) यह तय कर सकता है कि आरोपी पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए या नहीं। नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार कर सुधार गृह भेज दिया गया है।
केस दर्ज करने और जांच में ढिलाई पर उठते सवाल
पीड़ित परिवार जमशेदपुर से रांची पहुंचा और 23 सितंबर 2026 को थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। आवेदन पर पिठोरिया थाना प्रभारी द्वारा सब-इंस्पेक्टर सत्येंद्र प्रसाद को जांच अधिकारी (IO) नियुक्त किया गया है। हालांकि, परिजनों और नागरिक समाज द्वारा जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाए जा रहे हैं:
CCTV फुटेज जब्त करने में देरी: क्या पुलिस ने हॉस्टल के 21 और 22 सितंबर के CCTV डीवीआर (DVR) को तुरंत सील किया? जो जानकारियां छन कर सामने आ रही हैं उसके अनुसार कांड की जांच में पूरी लापरवाही बरती जा रही है।
बाल-संवेदनशील बयान (Child-Friendly Statement): क्या पीड़ित बालक का बयान पॉक्सो नियमों के तहत किसी महिला पुलिस अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी की मौजूदगी में दर्ज किया गया?
प्रबंधन पर FIR क्यों नहीं?: सिर्फ अज्ञात या छात्र पर केस दर्ज करने के बजाय, घटना को छिपाने वाले हॉस्टल वार्डन और प्रिंसिपल पर धारा 21 के तहत नामजद मामला दर्ज कर उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लिया गया?
न्याय की गुहार और उठती मांगें
पीड़ित के पिता ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए चार मुख्य मांगें रखी हैं:
मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर आरोपी छात्र पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
पीड़ित मासूम का बयान बाल-अनुकूल वातावरण में दर्ज कर उसे मानसिक व शारीरिक सुरक्षा दी जाए।
हॉस्टल के CCTV फुटेज, रजिस्टर एवं अन्य डिजिटल रिकॉर्ड तत्काल जब्त किए जाएं।
बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वाले स्कूल व हॉस्टल प्रशासन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारी-भरकम फीस लेने वाले निजी हॉस्टल बच्चों की सुरक्षा के प्रति कितने गैर-जिम्मेदार हैं। अब देखना यह है कि रांची पुलिस और बाल संरक्षण आयोग इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करते हैं और पीड़ित मासूम को न्याय दिला पाते हैं या नहीं।
