सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और 8 घंटे की ड्यूटी की मांग को लेकर ऑल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन और ऑल इंडिया ड्राइवर जॉइंट कमेटी का देशव्यापी आंदोलन;
रांची में भी थम सकती है रफ्तार
आगामी 12 नवंबर 2026 को देश की सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम सकती है। भारत के विभिन्न वाहन चालकों और प्रमुख ड्राइवर यूनियनों, जिनमें ऑल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन और ऑल इंडिया ड्राइवर जॉइंट कमेटी शामिल हैं, ने मिलकर 12 नवंबर को देशव्यापी ‘स्टीयरिंग छोड़ो आंदोलन’ (पहिया जाम) का बड़ा आह्वान किया है। इस आंदोलन का व्यापक असर झारखंड की राजधानी रांची समेत राज्य के तमाम छोटे-बड़े शहरों में देखने को मिल सकता है।
दिन-रात मेहनत करके देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले मालवाहक, बस, ऑटो और कैब चालकों ने अब अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने का मन बना लिया है। चालकों का स्पष्ट कहना है कि यदि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो 12 नवंबर को देश भर में वाणिज्यिक और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप रहेगा।
क्या हैं ड्राइवरों की 3 प्रमुख और मुख्य मांगें?
यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, यह आंदोलन अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि सालों से उपेक्षित पड़े ड्राइवर समाज की गूंज है। इस देशव्यापी आंदोलन की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
1. सम्मानजनक और निश्चित न्यूनतम वेतन
चालकों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में भी उन्हें बेहद कम और अनिश्चित मजदूरी पर काम करना पड़ता है। सरकार और निजी वाहन मालिकों द्वारा ड्राइवरों के लिए एक सम्मानजनक और निश्चित न्यूनतम वेतन लागू किया जाए ताकि वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मान के साथ कर सकें।
2. सरकारी सामाजिक सुरक्षा का लाभ
चौबीसों घंटे दुर्घटना के खतरे के बीच गाड़ी चलाने वाले इन ड्राइवरों के पास न तो स्वास्थ्य बीमा की सुविधा होती है और न ही भविष्य सुरक्षा की कोई गारंटी। यूनियनों की मांग है कि देश के सभी चालकों को पेंशन, दुर्घटना बीमा, ईएसआई (ESI) और पीएफ (PF) जैसी सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का स्पष्ट और सीधा लाभ दिया जाए।
3. काम के निश्चित घंटे (वर्क आवर्स)
ड्राइवरों को लगातार 14 से 18 घंटे तक गाड़ियां चलानी पड़ती हैं, जिससे न केवल उनका शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य खराब होता है, बल्कि सड़कों पर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। चालकों की प्रमुख मांग है कि उनके काम करने के घंटे अधिकतम 8 घंटे तय किए जाएं और अतिरिक्त समय के लिए ओवरटाइम का प्रावधान हो।
रांची बनेगा आंदोलन का प्रमुख केंद्र: ‘राजधानी से गूंजेगी चालकों की आवाज’
झारखंड की राजधानी रांची देश के प्रमुख लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऑल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि 12 नवंबर के इस आंदोलन का व्यापक असर रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड, आईटीआई बस स्टैंड, कांटाटोली, धुर्वा, नामकुम और तुपुदाना जैसे प्रमुख ट्रांसपोर्ट हबों में दिखेगा।
रांची के चालकों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा है कि राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली लंबी दूरी की बसों से लेकर मालवाहक ट्रकों, पिकअप वैन और लोकल ऑटो-कैब तक के पहिए उस दिन थमे रहेंगे। रांची में ड्राइवर यूनियनें शांतिपूर्ण प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपकर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करेंगी।
यूनियन के स्थानीय नेताओं ने कहा, “हम दिन-रात जागकर लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं, देश की आपूर्ति श्रृंखला को चालू रखते हैं, लेकिन जब हमारी अपनी सुरक्षा और रोजी-रोटी की बात आती है तो हमें लावारिस छोड़ दिया जाता है। 12 नवंबर को रांची का एक-एक ड्राइवर अपनी एकजुटता दिखाएगा।”
आंदोलन का क्या हो सकता है असर?
यदि 12 नवंबर को यह आंदोलन पूर्ण रूप से लागू होता है, तो इसका असर आम जीवन और व्यापार पर व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है:
*यात्री परिवहन प्रभावित:* अंतर्राज्यीय और अंतर-जिला बस सेवाएं ठप होने से आम यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जरूरी सामानों की आपूर्ति में बाधा : ट्रकों और मालवाहकों का पहिया जाम होने से दूध, सब्जी, फल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवक पर असर पड़ सकता है।
स्थानीय आवागमन पर असर: रांची जैसे शहरों में ऑटो, ई-रिक्शा और ऑनलाइन कैब सेवाएं प्रभावित होने से दफ्तर और स्कूल जाने वालों को परेशानी हो सकती है।
यूनियनों की सरकार से अपील
ऑल इंडिया ड्राइवर जॉइंट कमेटी और ऑल झारखंड ड्राइवर ट्रेड यूनियन ने केंद्र व राज्य सरकारों से मांग की है कि आंदोलन की नौबत आने से पहले ही चालकों के प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया जाए और उनकी जायज मांगों को पूरा करने के लिए ठोस कानून और नीतियां बनाई जाएं।
यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि 12 नवंबर का ‘स्टीयरिंग छोड़ो आंदोलन’ महज़ एक चेतावनी है। यदि इसके बाद भी ड्राइवरों के कल्याण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन रूप भी ले सकता है।
थम जाएंगे पहिये…
12 नवंबर 2026 को होने वाला ‘स्टीयरिंग छोड़ो आंदोलन’ देश के लाखों वाहन चालकों के आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। रांची समेत देश भर के ड्राइवर यूनियनों की इस एकजुटता ने शासन और प्रशासन के सामने एक बड़ा यक्ष प्रश्न खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक देश की रफ्तार बनाए रखने वाले चालकों को उनके जायज अधिकारों से वंचित रखा जाएगा। इस आंदोलन से साफ चेतावनी दी जा रही है कि वाहनों के पहियों की रफ्तार थमने से देश के आर्थिक ढांचे के पहिए भी थम सकते हैं।


