Friday, October 2

बोकारो: पोषण सिर्फ महंगे या विशेष खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि घर और आसपास आसानी से मिलने वाली स्थानीय सामग्री से भी पौष्टिक भोजन तैयार किया जा सकता है। इसी संदेश के साथ बोकारो में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जिला स्तरीय पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में जिले की 11 आईसीडीएस परियोजनाओं की आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं ने स्थानीय एवं पारंपरिक खाद्य सामग्रियों से तैयार अलग-अलग पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए।

पुलिस लाइन परिसर में आयोजित कार्यक्रम में उपायुक्त अजय नाथ झा समेत जिला प्रशासन के अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं के स्टॉल का निरीक्षण किया और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी चखा। इस दौरान सेविकाओं और सहायिकाओं की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की गई।

आंगनबाड़ी केंद्रों को बच्चों के विकास का मजबूत केंद्र बनाने पर जोर

कार्यक्रम में उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि पोषण माह को केवल एक महीने की गतिविधि तक सीमित नहीं रखना है। इसे निरंतर जनभागीदारी से चलने वाले अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों को गांव के बच्चों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए हर बच्चे तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उपायुक्त ने गांवों में बच्चों की पहचान और मैपिंग कर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई भी बच्चा पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं से वंचित न रहे। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं से पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने की अपील की।

रागी मोमो और मड़वा पिज्जा रहे आकर्षण का केंद्र

पौष्टिक व्यंजन प्रतियोगिता में स्थानीय खाद्य सामग्रियों के इस्तेमाल के साथ नए तरीके से तैयार किए गए व्यंजन खास आकर्षण रहे। 11 आईसीडीएस परियोजनाओं की ओर से लगाए गए स्टॉलों पर अलग-अलग पारंपरिक और पौष्टिक व्यंजनों की प्रस्तुति की गई।

प्रतियोगिता में बेरमो, कसमार और नावाडीह परियोजनाओं को संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार के लिए चुना गया। बेरमो परियोजना की माला देवी द्वारा तैयार रागी मोमो विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

वहीं पेटरवार, चंद्रपुरा, चंदनकियारी और जरीडीह परियोजनाओं को संयुक्त रूप से द्वितीय पुरस्कार दिया गया। चंद्रपुरा परियोजना की रंजीता देवी द्वारा तैयार मड़ुआ पिज्जा की भी विशेष सराहना हुई।

गोमिया, चास सिटी और चास रूरल परियोजनाओं को तृतीय पुरस्कार के लिए चुना गया। इन परियोजनाओं में स्थानीय खाद्य सामग्रियों से तैयार लड्डू समेत कई पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए।

सभी चयनित परियोजनाओं को प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

घर-घर पोषण का संदेश पहुंचा रहीं आंगनबाड़ी सेविकाएं

जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाएं बच्चों और महिलाओं की देखभाल के साथ-साथ घर-घर जाकर लोगों को पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवार आंगनबाड़ी केंद्र तक नहीं पहुंच पाते, ऐसे में सेविकाओं का घर तक पहुंचकर जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने कहा कि छोटे बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण एवं स्वास्थ्य में आंगनबाड़ी सेविकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने नव चयनित सेविकाओं से भी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ काम करने की अपील की।

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी डॉ. सुमन गुप्ता ने कहा कि पोषण माह का उद्देश्य गर्भवती और धात्री महिलाओं, किशोरियों तथा छह वर्ष तक के बच्चों तक बेहतर पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्थानीय और आसानी से उपलब्ध खाद्य पदार्थों से पौष्टिक भोजन तैयार करने की आदत को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

सात नव चयनित सेविकाओं-सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र

कार्यक्रम के दौरान सात नव चयनित आंगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किया गया। वहीं, दो बच्चों का अन्नप्राशन कराया गया। उपायुक्त, जिला परिषद अध्यक्ष, उप विकास आयुक्त और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने बच्चों को खीर खिलाकर इस रस्म को पूरा किया।

इसके अलावा तीन गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म भी पूरी की गई। उन्हें पौष्टिक आहार और फल देकर गर्भावस्था के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक भोजन के महत्व की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में जिला समाज कल्याण विभाग के पदाधिकारी, आईसीडीएस परियोजनाओं की पर्यवेक्षिकाएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं-सहायिकाएं और संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।

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