रांची: झारखंड के दो जनप्रतिनिधियों की चुनावी संपत्ति घोषणा और जमीन से जुड़े लेनदेन को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के समक्ष जांच की मांग किए जाने का मामला सामने आया है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार ने गिरिडीह से सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और हटिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक नवीन जायसवाल से संबंधित संपत्ति एवं जमीन के रिकॉर्ड को लेकर अलग-अलग अभ्यावेदन दिए हैं। इन शिकायतों में संपत्तियों के घोषित मूल्य, बाजार मूल्य और कुछ जमीनों के लेनदेन की जांच की मांग की गई है।
चंद्र प्रकाश चौधरी के मामले में क्या शिकायत?
12 अप्रैल 2026 को ACB के अपर महानिदेशक को भेजे गए अभ्यावेदन में शिकायतकर्ता ने गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी के चुनावी हलफनामे में दर्ज संपत्तियों को लेकर सवाल उठाए हैं। शिकायत में मुख्य रूप से रांची के बरियातू स्थित एक मकान के घोषित खरीद मूल्य और उसके अनुमानित मौजूदा बाजार मूल्य के बीच अंतर का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि दोनों मूल्यों में करीब छह गुना का अंतर दिखाई देता है।
शिकायत में कुछ गैर-कृषि भूमि के घोषित मूल्यों को भी बाजार दर की तुलना में कम बताए जाने का दावा किया गया है। इसके आधार पर शिकायतकर्ता ने संबंधित संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य, खरीद और निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत तथा संपत्ति से जुड़े वित्तीय लेनदेन की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
शिकायत में बड़गाईं, रांची स्थित खाता संख्या 112 और प्लॉट संख्या 2592 एवं 1221 से संबंधित संपत्ति की भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने इस संपत्ति के वर्तमान कब्जाधारियों और खरीद/निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत की जांच की मांग की है।
नवीन जायसवाल के खिलाफ शिकायत में क्या कहा गया?
हटिया विधायक नवीन जायसवाल के मामले में 12 अप्रैल 2026 को ACB को दिए गए अभ्यावेदन में उनकी चुनावी संपत्ति घोषणा और जमीन से जुड़े दस्तावेजों को आधार बनाया गया है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ अचल संपत्तियों के घोषित खरीद मूल्य और वर्तमान अनुमानित बाजार मूल्य में काफी अंतर है। शिकायत में नगड़ी, रांची स्थित खाता संख्या 230 और प्लॉट संख्या 908A, 908B, 908C और 908D से जुड़ी संपत्ति की जांच की मांग की गई है।
इसके अलावा शिकायत में नगड़ी प्रखंड में 25 एकड़ से अधिक आदिवासी जमीन को कथित तौर पर नवीन जायसवाल के रिश्तेदारों के नाम हस्तांतरित या म्यूटेट किए जाने के आरोप की भी जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने इस लेनदेन की जांच CNT/SPT Act, 1908 के प्रावधानों के तहत करने का अनुरोध किया है।
ACB से क्या मांग की गई?
दोनों मामलों में शिकायतकर्ता ने केवल संपत्ति के बाजार मूल्य की जांच तक मामला सीमित नहीं रखा है। अभ्यावेदनों में संबंधित संपत्तियों की खरीद और निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत, वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है।
नवीन जायसवाल के मामले में ACB से प्रारंभिक जांच, संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य और धन के स्रोत का सत्यापन तथा नगड़ी की जमीन से जुड़े लेनदेन की कानूनी जांच की मांग की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में प्रथम दृष्टया अनियमितता सामने आती है तो कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाए।
चंद्र प्रकाश चौधरी से जुड़े अभ्यावेदन में भी संपत्ति के वास्तविक मूल्य, धन के स्रोत और संबंधित संपत्ति के वित्तीय लेनदेन की विस्तृत जांच का अनुरोध किया गया है।
सरकारी स्तर पर क्या हुआ?
उपलब्ध दस्तावेजों में 22 जून 2026 की दो अलग-अलग सरकारी चिट्ठियां भी शामिल हैं। इनमें एक पत्र चंद्र प्रकाश चौधरी और दूसरा नवीन जायसवाल से संबंधित है। दोनों पत्र झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की ओर से सरकार के अपर सचिव अखिलेश कुमार सिंह को संबोधित हैं और इनमें संबंधित मामले में शपथ पत्र संलग्न होने की जानकारी दी गई है।
अब जांच पर टिकी नजर
इन दस्तावेजों से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दोनों जनप्रतिनिधियों की संपत्ति और जमीन से जुड़े मामलों में शिकायतें की गई हैं और संबंधित दस्तावेज सरकारी स्तर पर प्रस्तुत किए गए हैं। शिकायतों में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
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