भारतीय एथलीट ज्योति याराजी ने अपने खेल करियर के शुरुआती दिनों का एक ऐसा किस्सा साझा किया है, जो बताता है कि अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने किस तरह मुश्किलों का सामना किया। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर ज्योति ने बताया कि जब वह खेल की प्रैक्टिस के लिए जाती थीं, तो कई बार उन्हें यह बात घरवालों से छिपानी पड़ती थी।
ज्योति ने अपने संघर्ष को याद करते हुए कहा, “घरवालों से छुपाकर स्कूल बैग में मैं स्पोर्ट्स के कपड़े ले जाती थी।” उनके मुताबिक, एक दिन प्रैक्टिस से लौटने में उन्हें देर हो गई। इससे नाराज होकर उनके भाई ने उन्हें मारा।
उन्होंने बताया, “फिर मैं रोयी, फिर अगले दिन मैं फिर प्रैक्टिस के लिए गई।” ज्योति के मुताबिक, भाई ने उन्हें रोकने के लिए मारना जारी रखा, लेकिन उनका खेल के प्रति जुनून कम नहीं हुआ।
ज्योति ने अपने उसी संघर्ष को एक लाइन में बयां करते हुए कहा, “वो मार-मार के थक गया, लेकिन मैं नहीं थकी।”
उनकी यह कहानी बताती है कि एथलेटिक्स में आगे बढ़ने का उनका सफर सिर्फ मैदान पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। शुरुआत में उन्हें अपने ही घर में प्रैक्टिस के लिए जाने की चुनौती का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इसे अपने रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया।
आज ज्योति याराजी भारत की प्रमुख महिला हर्डलर्स में शामिल हैं और नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं। शुरुआती दौर की यह कहानी उनके खेल करियर में संघर्ष, जिद और लगातार मेहनत की झलक देती है।
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