दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन कर रहे 700 प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है, इसमें पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज जैसे नाम शामिल है तो वहीं मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी समेत कई प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे है , पार्क के आसपास भारी बलो में पुलिस को भी तैनात कर दिया गया है।
CJP प्रवक्ता सौरभ दास से मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि ” जैसे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया था , ज्ञानेश कुमार जो कि इस देश का गद्दार है , ओरिजनल एंटीनेशनल है उसका भी इस्तीफा लेके वापस जाएंगे। ”
पटना और रांची में जबरदस्त आंदोलन
झारखण्ड की राजधानी रांची में 30 सितम्बर को झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (JMM) कि ओर से राजभवन का घेराव किया गया जिसमें सैकड़ो की संख्या में लोग जुटे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग किया गया , हालाँकि जब झारखण्ड डिजिटल ने लोगो से बातचीत की तो कुछ लोगो को ये भी नहीं पता था कि ये घेराव क्यों किया जा रहा है।
तो वहीं पटना में शुक्रवार को आज पटना में सीपीआई (माले) की ओर से लोकतंत्र बचाओ मार्च निकाला गया है। इसमें कांग्रेस, सीपीएम और राजद, ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) भी शामिल हैं।
देशभर में ” ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो ” , ” gyanesh its done bro“, ” वोट चोर गद्दी छोड़ ” ,” वोट चोर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो ” जैसे नारे लगाए जा रहे है।
क्यों शुरू हुआ ये विवाद ?
ये पूरा विवाद 23 सितम्बर के इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक रिपोर्ट से शुरू हुई। रिपोर्ट को रितिका चोपड़ा नाम की एक पत्रकार ने छापा जिसमें दावा किया गया कि ने पिछले करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े कई फैसलों से था।
रिपोर्ट में मुख्य रूप से मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR), Form-6 में बदलाव, चुनावी IT सिस्टम के केंद्रीकरण और पश्चिम बंगाल में करीब 16 लाख अपीलों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में कहा कि महत्वपूर्ण बदलाव उनकी आपत्तियों के बावजूद किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार मई से अगस्त 2026 के बीच पूर्ण तीन-सदस्यीय चुनाव आयोग की बैठक भी नहीं हुई, जबकि इसी दौरान SIR से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लिए जा रहे थे।
कितना संभव है ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा ?
अगर मुख्य चुनाव आयुक्त खुद से इस्तीफा देना चाहे तो ज्ञानेश कुमार लिखित रूप में, अपने हस्ताक्षर से, भारत के राष्ट्रपति को संबोधित करके इस्तीफा दे सकते हैं। यह प्रावधान 2023 के Chief Election Commissioner and Other Election Commissioners Act की धारा 11(1) में है।
पर अगर बात उनको हटाने की प्रक्रिया की करें तो चुनाव आयुक्त को हटाना आसान प्रक्रिया नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत CEC को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी है। दोनों सदनों की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।
फिलहाल तो पूरे देशभर में चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर मांग गंभीर होता दिख रहा है अब देखना ये होगा इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया आगे क्या रुख अपनाता है।
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