Wednesday, October 14

रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां और झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व झामुमो के वरिष्ठ नेता रहे दिवंगत शिबू सोरेन की पत्नी रूपी सोरेन का निधन हो गया है। 7 अक्टूबर 2026 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की जानकारी डॉक्टर दीपक गुप्ता और डॉक्टर उज्जवल राय ने दी। उनके निधन की खबर सामने आते ही सोरेन परिवार में शोक की लहर है।

रूपी सोरेन लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। सितंबर में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 7 अक्टूबर को उनकी हालत बेहद गंभीर हो गई थी और उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी।

शिबू सोरेन के संघर्ष की जीवनसंगिनी

रूपी सोरेन की पहचान सिर्फ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की पत्नी या मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां के तौर पर नहीं थी। उन्होंने उस दौर को करीब से देखा और जिया, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और शिबू सोरेन आदिवासी समाज के अधिकारों तथा महाजनी शोषण के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे।

शिबू सोरेन के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष के दौरान कई बार उन्हें घर से दूर रहना पड़ा। ऐसे समय में परिवार की जिम्मेदारी रूपी सोरेन ने संभाली। पति आंदोलन में सक्रिय रहे तो उन्होंने घर, बच्चों और परिवार को संभालने का दायित्व निभाया।

कम उम्र में हुई थी शादी

रूपी सोरेन का विवाह शिबू सोरेन से 1962 में हुआ था। इसके बाद उनका जीवन सामान्य गृहस्थी की तरह नहीं रहा। शिबू सोरेन का अधिकांश समय आंदोलन और सामाजिक संघर्ष में बीता।

रूपी सोरेन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा परिवार को संभालते हुए बिताया। उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश की और मुश्किल दौर में परिवार के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।

परिवार की जिम्मेदारी संभालती रहीं

शिबू सोरेन के लंबे राजनीतिक और सामाजिक सफर के दौरान रूपी सोरेन परिवार की महत्वपूर्ण कड़ी रहीं। उनके चार बच्चों में दुर्गा सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन और अंजनी सोरेन शामिल हैं।

बड़े बेटे दुर्गा सोरेन झारखंड की राजनीति में सक्रिय रहे। हेमंत सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री बने, जबकि बसंत सोरेन भी राजनीति में सक्रिय हैं।

इस पूरे सफर में रूपी सोरेन की भूमिका एक मां और परिवार की मजबूत आधारशिला के रूप में रही।

1999 में दुमका से लड़ा था चुनाव

रूपी सोरेन ने खुद भी सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने 1999 में दुमका लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बावजूद सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान मुख्य रूप से सोरेन परिवार और शिबू सोरेन के लंबे संघर्ष से जुड़ी रही।

पति के निधन के बाद भी संभाली विरासत

शिबू सोरेन के निधन के बाद रूपी सोरेन परिवार के लिए एक भावनात्मक आधार बनी रहीं। जुलाई 2025 में शिबू सोरेन के निधन के बाद परिवार ने एक बड़े राजनीतिक और व्यक्तिगत नुकसान का सामना किया था।

इसके बाद 2026 में राष्ट्रपति भवन में शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 23 जून 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान रूपी सोरेन को सौंपा था। उस समय वह व्हीलचेयर पर थीं। राष्ट्रपति खुद मंच से नीचे आकर उनके पास पहुंची थीं। यह दृश्य शिबू सोरेन और रूपी सोरेन के लंबे साथ की भावुक तस्वीर बन गया था।

बीमारी के बीच अंतिम दौर

रूपी सोरेन लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थीं। सितंबर 2026 में सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें रांची के हिल व्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी तबीयत को लेकर कई बार गंभीर अपडेट सामने आए।

7 अक्टूबर को उनकी हालत गंभीर हो गई और उन्हें जीवनरक्षक प्रणाली पर रखा गया। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थी। कुछ घंटों बाद उनके निधन की जानकारी सामने आई।

एक मां, एक पत्नी और संघर्ष की साथी

रूपी सोरेन की जिंदगी को सिर्फ एक राजनीतिक परिवार की महिला के तौर पर देखना उनके सफर को छोटा कर देगा।

उन्होंने उस दौर में परिवार संभाला, जब उनके पति झारखंड के लिए आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने बच्चों को पाला, परिवार को जोड़े रखा और शिबू सोरेन के लंबे संघर्ष की साथी बनी रहीं।

शिबू सोरेन की राजनीतिक यात्रा में जंगल, आंदोलन, जेल और सत्ता के कई पड़ाव आए। इन सभी पड़ावों के पीछे एक ऐसा घर भी था, जिसकी जिम्मेदारी रूपी सोरेन संभालती रहीं।

आज रूपी सोरेन नहीं रहीं। लेकिन झारखंड के राजनीतिक इतिहास में उनका नाम उस महिला के रूप में याद किया जाएगा, जिसने संघर्ष के दिनों में परिवार को संभाला और एक ऐसे सफर की साथी बनीं, जिसने झारखंड की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया।

रूपी सोरेन को विनम्र श्रद्धांजलि।

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