Wednesday, October 14

नई दिल्ली। मोबाइल सिम कार्ड को लेकर सरकार ने 24 अगस्त 2026 से नियमों की निगरानी सख्त कर दी है। अब टेलीकॉम कंपनियों को नया सिम जारी करने से पहले यह जांचना अनिवार्य होगा कि ग्राहक के नाम पर पहले से कितने मोबाइल कनेक्शन दर्ज हैं। हालांकि सिम रखने की मौजूदा सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। भारत के अधिकांश हिस्सों में एक व्यक्ति अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है, जबकि जम्मू-कश्मीर, असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह सीमा 6 सिम तय है। यह सीमा किसी एक कंपनी विशेष के लिए नहीं, बल्कि सभी टेलीकॉम ऑपरेटरों के नंबरों को मिलाकर लागू होगी।

सीमा पूरी होने पर नहीं मिलेगा नया सिम

अगर किसी ग्राहक के नाम पर पहले से तय सीमा जितने सिम मौजूद हैं और वह नया कनेक्शन लेना चाहता है, तो ऑपरेटर उसे नया सिम जारी नहीं करेगा। सीमा के भीतर रहने वाले ग्राहकों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनके पुराने नंबर सामान्य रूप से चलते रहेंगे। ध्यान देने वाली बात यह है कि कोई पुराना या बंद पड़ा नंबर भी दस्तावेजों में दर्ज होने पर गिनती में शामिल रहेगा, इसलिए ऐसे नंबरों को समय रहते बंद कराना जरूरी होगा। जिन लोगों के नाम पर पहले से तय सीमा से ज्यादा सिम हैं, उनके सभी नंबर अचानक बंद नहीं किए जाएंगे, बल्कि उन्हें अतिरिक्त नंबर सरेंडर, ट्रांसफर या डिस्कनेक्ट करने का विकल्प दिया जाएगा। नियमों का पालन न करने पर अतिरिक्त कनेक्शनों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

एक सिस्टम से पूरे देश पर नजर

दूरसंचार विभाग ने इसके लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) तैयार किया है, जिससे टेलीकॉम कंपनियां अपने ग्राहकों के सक्रिय कनेक्शनों का डेटा साझा करेंगी। इससे अलग-अलग कंपनियों या राज्यों से नंबर लेकर सीमा से बचना मुश्किल हो जाएगा। 23 अगस्त से सीमा तक पहुंच चुके ग्राहकों की फोटो भी डीआईपी पर उपलब्ध कराई गई है, ताकि नए आवेदन की जांच के दौरान मिलान किया जा सके। 30 नवंबर के बाद इस व्यवस्था को रियल टाइम करने की योजना है।

मकसद: फर्जी सिम और धोखाधड़ी पर रोक

सरकार का मुख्य उद्देश्य फर्जी सिम, पहचान की चोरी, स्पैम, फिशिंग और वित्तीय धोखाधड़ी रोकना है। ग्राहक संचार साथी पोर्टल या ऐप पर जाकर खुद जांच सकते हैं कि उनके नाम पर कितने नंबर सक्रिय हैं और अनजान नंबरों को रिपोर्ट कर बंद करा सकते हैं।

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