मेदिनीनगर: मेले में रोशनी, झूले और मनोरंजन के बीच बच्चों का बचपन कहीं मजदूरी में तो नहीं खो रहा? पलामू के मेदिनीनगर स्थित शिवाजी मैदान में लगे डिज्नीलैंड मेले की जांच के दौरान कुछ ऐसा ही सामने आया। यहां सात बच्चे काम करते मिले, जिसके बाद बाल संरक्षण और श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें काम से मुक्त कराया।
यह कार्रवाई बाल श्रम के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान की गई। बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और श्रम विभाग की टीम ने मेले में पहुंचकर अलग-अलग दुकानों, झूलों और अन्य गतिविधियों की जांच की। इसी दौरान बच्चों से काम कराए जाने की जानकारी सामने आई।
बच्चों को तत्काल वहां से हटाया गया और आवश्यक संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जिस मेले में बच्चे खेलने आने चाहिए, वहीं मजदूरी करते मिले
डिज्नीलैंड मेला बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाया गया है। लेकिन जांच के दौरान ऐसे बच्चे सामने आए जो मेले का हिस्सा दर्शक के तौर पर नहीं, बल्कि कामगार के तौर पर बने हुए थे।
यहीं से बाल श्रम को लेकर बड़ा सवाल खड़ा होता है।
क्या मेले में बच्चों से काम कराया जा रहा था और संचालकों को इसकी जानकारी नहीं थी?
अगर जानकारी थी तो उन्हें काम पर रखा ही क्यों गया?
और अगर जानकारी नहीं थी तो मेले के संचालन और निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?
संयुक्त टीम की कार्रवाई ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।
सात बच्चों का रेस्क्यू, अब काउंसलिंग और पुनर्वास
रेस्क्यू किए गए बच्चों को सिर्फ काम से हटाकर छोड़ नहीं दिया गया है। बाल कल्याण समिति की निगरानी में उनकी काउंसलिंग कराई जा रही है।
बच्चों की पारिवारिक और सामाजिक स्थिति के साथ उनकी पढ़ाई को लेकर भी जानकारी जुटाई जाएगी। जिन बच्चों की शिक्षा बीच में छूट गई है, उन्हें दोबारा स्कूल से जोड़ने की कोशिश की जाएगी। जरूरत के अनुसार सरकारी योजनाओं और पुनर्वास से जुड़ी सुविधाओं का लाभ भी दिलाया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य सिर्फ बाल श्रम रोकना नहीं, बल्कि बच्चों को शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की ओर वापस ले जाना भी है।
दुकानदारों और संचालकों को भी चेतावनी
अभियान के दौरान मेले के संचालकों और दुकानदारों के साथ बैठक कर उन्हें बाल एवं किशोर श्रम कानूनों की जानकारी दी गई। साफ शब्दों में चेतावनी दी गई कि दोबारा किसी बच्चे को काम पर रखने की शिकायत मिली तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
टीम ने मेले में काम कर रहे अन्य बच्चों की भी जांच की। जिन मामलों में तत्काल कार्रवाई की जरूरत नहीं मिली, वहां संबंधित लोगों को बच्चों से काम नहीं कराने की सख्त हिदायत दी गई।
14 साल से कम उम्र के बच्चे से मजदूरी कराना अपराध
श्रम विभाग के मुताबिक 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का श्रम कराना कानूनन अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी नियोजकों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
लेकिन कानून होने के बावजूद सवाल यही है कि बच्चे काम तक पहुंच कैसे रहे हैं?
मेले, होटल, दुकान या किसी अन्य प्रतिष्ठान में किसी बच्चे को काम करते देखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समाज और कारोबारियों की भी उतनी ही जिम्मेदारी है कि बच्चों को मजदूरी में धकेलने के बजाय शिक्षा और सुरक्षित वातावरण मिले।
अब आगे की निगरानी सबसे अहम
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि बाल श्रम के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। सार्वजनिक स्थानों, मेलों, दुकानों, होटलों और अन्य प्रतिष्ठानों में जांच की जाएगी।
इस अभियान में बाल कल्याण समिति के सदस्य रविशंकर, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी जिसान अहमद, पीओएनआईसी नासिर अली, श्रम विभाग के एलईओ सदर अनिल कुमार, एलईओ चैनपुर राहुल कुमार, चाइल्ड हेल्पलाइन के समन्वयक अमित कुमार, सुधांशु शुक्ला, गौतम कुमार और मनीष कुमार समेत अन्य अधिकारी-कर्मी शामिल रहे।
डिज्नीलैंड मेले से सात बच्चों को मुक्त कराया जाना निश्चित तौर पर राहत की खबर है। लेकिन असली सवाल अब यह है कि इन बच्चों को दोबारा ऐसी जगह काम करने की नौबत न आए-क्या प्रशासन इसकी भी निगरानी करेगा?
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