Saturday, October 31

बच्चों और युवाओं को निकोटीन की लत से बचाने पर जोर, तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित; स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री पर सख्ती की उठी मांग

रांची। झारखंड को तंबाकू मुक्त बनाने और बच्चों एवं युवाओं को तंबाकू तथा निकोटीन की लत से बचाने के लिए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय (NUSRL), रांची और सोसियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (SEEDS) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, विधि विशेषज्ञों, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP), कोटपा-2003 और झारखंड कोटपा संशोधन अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करना और इनके प्रवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा करना था।

कार्यशाला में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश सुंथलिया ने कहा कि बच्चों और युवाओं को तंबाकू एवं निकोटीन की लत से बचाना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। इसके लिए राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम और तंबाकू मुक्त युवा अभियान को और मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्होंने तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।

NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि तंबाकू की लत केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य को प्रभावित करने वाली गंभीर सामाजिक चुनौती है। इससे निपटने के लिए संस्थागत जिम्मेदारी के साथ समाज के सभी वर्गों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।

स्कूलों के आसपास तंबाकू बिक्री पर सख्ती की जरूरत

राज्य स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव सह अतिरिक्त खाद्य सुरक्षा आयुक्त अनुज कुमार प्रसाद ने कहा कि तंबाकू मुक्त पीढ़ी तैयार करने के लिए मजबूत कानूनों के साथ उनका सख्ती से अनुपालन भी जरूरी है। उन्होंने नाबालिगों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर रोक, शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री से संबंधित नियमों के पालन और तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान दिशानिर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष जोर दिया।

सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता रंजीत सिंह ने कोटपा-2003 और झारखंड कोटपा संशोधन अधिनियम, 2021 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तंबाकू नियंत्रण कानूनों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना संबंधित सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और प्रवर्तन एजेंसियों की साझा जिम्मेदारी है।

नए निकोटीन उत्पादों से युवाओं को खतरा

वाइटल स्ट्रैटेजीज के उप निदेशक डॉ. अमित यादव ने तंबाकू और निकोटीन के नए उत्पादों से किशोरों पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर प्रभावी नियमन के साथ व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना भी जरूरी है।

कार्यशाला के दौरान आयोजित परिचर्चा में स्वास्थ्य, पुलिस, शिक्षा, नगर विकास, पंचायती राज और खाद्य सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान तंबाकू नियंत्रण कानूनों के सख्त अनुपालन, शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और जिला स्तर पर कानूनों के प्रवर्तन में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यशाला में इस बात पर सहमति जताई गई कि झारखंड को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था, नियमित निगरानी, विभागीय समन्वय और जनभागीदारी को बढ़ाना होगा। इसमें राज्य के विभिन्न जिलों से स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और पुलिस विभाग के नोडल पदाधिकारियों के साथ अलायंस ऑफ टोबैको फ्री झारखंड के सदस्यों ने भी भाग लिया।

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