रांची। झारखंड की राजधानी रांची में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) के विरोध में भाकपा माले, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA), CITU समेत विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। शुक्रवार को ‘People Against SIR’ के बैनर तले बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने प्रोटेस्ट मार्च निकाला। यह मार्च शहीद चौक से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए SIR की प्रक्रिया का विरोध किया और मतदाताओं के मताधिकार की रक्षा की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि SIR के खिलाफ देशभर में आंदोलन चलाया जा रहा है। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाये जाने से उनके लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की , कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा हो।
‘People Against SIR’ के बैनर तले एकजुट हुए संगठन
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि ‘People Against SIR’ के बैनर तले विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और छात्र संगठन एक मंच पर आकर SIR के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। रांची में निकाले गये मार्च में भी अलग-अलग संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के दौरान चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर विरोध जताया गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार नागरिकों का महत्वपूर्ण अधिकार है। इसलिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी योग्य मतदाता का नाम छूटने या हटने की स्थिति में उसके अधिकार प्रभावित न हों। उन्होंने इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं और चुनाव आयोग से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना था कि SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर गंभीर सवाल हैं और इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए।
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग प्रदर्शनकारियों की ओर से रखी गयी राजनीतिक और संगठनात्मक मांग है।
मतदाता सूची से हटाये गये नामों और मताधिकार की रक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों की दूसरी प्रमुख मांग उन मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है, जिनके नाम कथित तौर पर मतदाता सूची से हटाये गये हैं। संगठनों ने कहा कि किसी भी योग्य नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने चुनाव आयोग से ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, जिससे मतदाता सूची में नाम हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया पारदर्शी हो और प्रभावित लोगों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, मतदाता सूची से संबंधित किसी भी प्रक्रिया में नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकार सर्वोपरि होने चाहिए।
चुनाव आयोग के गठन में बदलाव की भी मांग
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग के गठन और उसके सदस्यों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी उठाई। उनका कहना था कि चुनाव आयोग को अधिक लोकतांत्रिक और पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
इस संबंध में उन्होंने मांग की कि चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए गठित तीन सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाए। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि चयन प्रक्रिया में बदलाव से आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर लोगों का भरोसा मजबूत किया जा सकता है।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
मार्च में शामिल संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि जब तक SIR की प्रक्रिया रद्द नहीं की जाती, चुनाव आयोग के गठन और चयन प्रक्रिया में लोकतांत्रिक बदलाव नहीं किये जाते तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न संगठनों से एक मंच पर एकजुट होकर अभियान को आगे बढ़ाने की अपील की। इस दौरान CITU के वाइस प्रेसिडेंट प्रकाश विप्लव और भाकपा माले के सुरेंद्र सेन के बयान भी इस विरोध प्रदर्शन से जुड़े रहे।
रांची में निकाले गये इस मार्च के माध्यम से संगठनों ने मतदाता अधिकारों, चुनाव आयोग की जवाबदेही और SIR की प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। अब इस मुद्दे पर आगे की राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधियों पर नजर रहेगी।


