हजारीबाग से स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान 31 वर्षीय मालती देवी की मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही की आशंका जताते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश देखा गया और उन्होंने विरोध जताते हुए सड़क पर प्रदर्शन भी किया।

मालती देवी के परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें दी गई किसी दवा या इंजेक्शन के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह आधिकारिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है कि महिला की मौत गलत इंजेक्शन की वजह से ही हुई। मौत की वास्तविक वजह मेडिकल जांच और पूरे मामले की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, फिर हुई मौत
मिली जानकारी के मुताबिक मालती देवी का इलाज हजारीबाग में चल रहा था। परिजनों के अनुसार उन्हें 27 सितंबर को अस्पताल लाया गया था। इलाज के दौरान 28 सितंबर को करीब दो बजे उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिवार ने उपचार के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं और अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए।
मृतका की 19 वर्षीय बेटी मुस्कान कुमारी ने मामले की जांच की मांग को लेकर आवेदन दिया है। आवेदन में इलाज के दौरान दी गई दवा और उपचार की प्रक्रिया की जांच कराने का आग्रह किया गया है। परिजनों का कहना है कि मौत की वास्तविक वजह सामने आनी चाहिए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
सवाल पूछे जाने पर क्या हुआ?
घटना के बाद परिजनों की ओर से अस्पताल की व्यवस्था और इलाज की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। परिजनों का दावा है कि जब उन्होंने इलाज और दवा से जुड़ी जानकारी जानने की कोशिश की तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। वहीं, कथित तौर पर पर्ची को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि इस हिस्से से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इलाज के दौरान वास्तव में क्या हुआ और महिला की मौत का चिकित्सकीय कारण क्या था।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से बढ़ी चिंता
मालती देवी की मौत के मामले ने एक बार फिर मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हाल के दिनों में अलग-अलग जगहों से इलाज में कथित लापरवाही, दवा की उपलब्धता, चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी और उपचार प्रक्रिया को लेकर शिकायतों के मामले सामने आते रहे हैं।
हजारीबाग में इससे पहले भी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर परिजनों के विरोध के मामले सामने आए हैं। पिछले महीने एक छह वर्षीय बच्चे की सांप के काटने के बाद मौत के मामले में परिजनों ने अस्पताल में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी के मौजूद नहीं होने तथा एंटी-वेनम उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाया था। हालांकि उस मामले में भी आरोपों और वास्तविक कारणों को अलग-अलग स्तर पर जांचना जरूरी है।
इसी तरह अलग-अलग अस्पतालों में कभी गलत इलाज, कभी ऑपरेशन से जुड़ी शिकायत, कभी खून की उपलब्धता और कभी दवाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे मामलों में बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है, लेकिन प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है।
परिजनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
मालती देवी के परिवार की मांग है कि अस्पताल में उनके इलाज से संबंधित सभी रिकॉर्ड, दवाओं और उपचार प्रक्रिया की जांच की जाए और मौत के वास्तविक कारण का पता लगाया जाए। परिवार का कहना है कि यदि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
घटना के विरोध में परिजनों ने झंडा चौक पर सड़क जाम कर विरोध भी जताया। बाद में मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मालती देवी की मौत की वास्तविक वजह क्या थी? क्या यह किसी गंभीर बीमारी की वजह से हुई, दवा का प्रतिकूल असर था या इलाज में किसी स्तर पर लापरवाही हुई? इन सवालों का जवाब जांच और मेडिकल रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
स्वास्थ्य सेवा से जुड़े ऐसे मामलों में पारदर्शिता सबसे जरूरी है। मरीज और उनके परिजनों को इलाज, दवा और मेडिकल प्रक्रिया की उचित जानकारी मिलना तथा किसी शिकायत की स्थिति में निष्पक्ष जांच होना जरूरी है, ताकि किसी भी घटना को लेकर बनी शंकाओं का तथ्यात्मक समाधान हो सके।
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