Sunday, October 25

रांची: झारखंड प्रदेश राजीव गांधी विचार समिति की ओर से ‘21वीं सदी’ विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और समिति के पदाधिकारी शामिल हुए। सेमिनार में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने राजीव गांधी के विचारों, उनकी विकास संबंधी दृष्टि और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने में उनके योगदान पर चर्चा की।

 

‘राजीव गांधी ने देश को विकास का रोडमैप दिया‘

 

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि राजीव गांधी ने 21वीं सदी के भारत को लेकर केवल सपना नहीं देखा, बल्कि उसे साकार करने के लिए देश के सामने एक रोडमैप भी रखा। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।

उन्होंने राजीव गांधी के कार्यकाल में शुरू की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे देश की संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत करने में मदद मिली।

 

मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का किया जिक्र

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि राजीव गांधी के नेतृत्व में युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। मतदान की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने का फैसला इसी सोच का हिस्सा था।

उन्होंने पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। इस संदर्भ में उन्होंने 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की अहमियत पर जोर दिया।

 

गांवों तक विकास का पैसा पहुंचाने पर दिया जोर

 

सुबोध कांत सहाय ने कहा कि राजीव गांधी ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली गड़बड़ियों और धन के रिसाव पर सवाल उठाए थे। उनका जोर इस बात पर था कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत आज भी बनी हुई है।

 

संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र पर मंथन की जरूरत

 

सेमिनार के उद्देश्य पर बात करते हुए सुबोध कांत सहाय ने कहा कि राजीव गांधी की विचारधारा और विकास की सोच से प्रेरित लोगों को सम्मानित करना तथा उनके विचारों पर चर्चा करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर चल रही बहस के बीच नई सोच विकसित करने और इन संस्थाओं की भूमिका पर गंभीर मंथन करने की आवश्यकता है।

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