सोशल मीडिया के गुंडे…जी हां..आज तक आपने गुंडों , अपराधियों की कहानी सुनी होगी लेकिन पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया के गुंडे काफी प्रचलित हो रहे हैं. ये कहां रहते हैं, कौन सी घटना को खुद अंजाम दिया है, इनपर दूसरों को सुपारी देने के अलावा खुद से कांड करने का कौन कौन सा केस दर्ज हुआ है यह सब जानकारियां अधुरी मिलेंगी क्योंकि इन्होंने सारे क्राइम सोशल मीडिया पर ही कर डाला है. कहीं वारदात हो जाने के बाद सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी लेने का प्रचलन इतनी तेजी से बढ़ रहा है देखते ही देखते लाखों लोगों तक इनकी बातें पहुंच जाती हैं भले उस कांड में इनका हाथ हो या नहीं. पुलिस जांच में भी कहीं आरोपी के साथ इनकी सांठगांठ नहीं निकल पाती लेकिन लोगों तक इनके नाम का डर पहुंचाने की कोशिश जरुर जारी रहती है.

गुमला से बरामद AK 56 से राहुल सिंह का क्या गठजोड़ ?
गुरुवार को गुमला पुलिस ने AK 56 हथियार समेत राजेन्द्र यादव को गिरफ्तार किया है. राजेन्द्र से गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूछताछ में ना तो किसी आपराधिक इतिहास की पुष्टि हुई है ना ही उसका कनेक्शन राहुल सिंह, राहुल दुबे समेत अन्य अपराधियों के साथ सामने आया है..लेकिन देर रात राहुल सिंह ने अपने सोशल मीडिया से पोस्ट कर वारदात की जिम्मेदारी ले डाली. वहीं इस मामलें में पुलिस का कहना है कि राहुल सिंह का कोई कनेक्शन इस मामले में नहीं है केवल अफवाह फैलाकर दहशत बनाने का प्रयास किया जा रहा है.
वारदात के बाद क्यों लेते हैं जिम्मेदारी, पहले ही क्यों नहीं करते घोषणा
आज के समय में कुछ नाम ऐसे है जो किसी वारदात के बाद उसकी जिम्मेदारी खुद ले लेते है. इनमें प्रिंस खान , राहुल दुबे , राहुल सिंह ,अमन साहू जैसे अपराधियों का नाम सूर्खियों में रहा है.
देखा जाये तो आज के समय में यह एक ट्रेंड बन चूका है की किसी भी वारदात को अंजाम दे कर उसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म में आकर उसकी जिम्मेदारी ले लिया जाए , इसके पीछे बहुत से कारण हैं। सोशल मीडिया पर हर उम्र के लोग मौजूद होते है चाहे वो बच्चा हो या फिर बुजुर्ग.
पहले के समय में अपराधी मीडिया को संपर्क करते थे और अपने जुर्म की जिम्मेदारी लेते थे जैसे कि अपहरण , फिरौती , हत्या गोलीबारी या रंगदारी। लेकिन आज के समय में यह एक ट्रेंड का रूप ले चुकी है। सोशल मीडिया पर हथियारों, धमकियों और हिंसा से जुड़े दावों को प्रचार मिलने से अपराधियों का मनोबल बढ़ने और युवाओं पर गलत प्रभाव पड़ सकता है
कंटेंट मॉडरेशन और प्राइवेसी
अगर सोशल मीडिया पार कंटेंट मॉडरेशन और प्राइवेसी है तो फिर ये सारी वीडियोस सोशल मीडिया से क्यों नहीं हटाई जाती है ,आखिर क्या है ये कंटेंट मॉडरेशन ??
कंटेंट मॉडरेशन का अर्थ ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए डेटा (जैसे मैसेज, टिप्पणियां, फोटो और वीडियो) की समीक्षा, निगरानी और प्रबंधन करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह प्लेटफ़ॉर्म के नियमों या सामुदायिक दिशानिर्देशों का पालन करता है।
अगर यह बात है तो फिर सोशल मीडिया पर खुले आम किसी को मारने की धमकी कोई कैसे दे सकता है या मारने के बाद जिम्मेदारी लेने के बाद जब वीडियो पोस्ट किया जाता है तो भी कई सोशल मीडिया अकाउंट से वो वीडियो कैसे चलती है , उन कंटेंट्स को क्यों नहीं हटाया जाता है ??
साइबर पुलिस पर बढ़ी जिम्मेदारी
अपराधी अब खुले आम चुनौती देते है और लोगो को धमकी भी देते है , चाहे वो देश के बाहर से धमकी दे रहे हो या देश के अंदर से , पुलिस के सामने भी यह बड़ी चुनौती है कि सोशल मीडिया पर खुलेआम जिम्मेदारी लेने और धमकी भरे दावे करने वाले अपराधियों तक कैसे पहुंचा जाए सवाल यह है कि जब अपराधी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर पुलिस को चुनौती दे रहे हैं, तो ऐसे अकाउंट और पोस्ट के खिलाफ समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है? अपराधी अपना खौफ दिखाना चाहते है और सोशल मीडिया के जरिये अपनी ताकत दिखाते है और लोगो को खुली धमकी और पुलिस को चुनौती देते है उन्हें ऐसा लगता है की उनके ऊपर कोई भी नहीं है और उन्हें किसी का भी खौफ नहीं , और इन सब चीज़ो से आम जनता और सोशल मीडिया में जो लोग मौजूद है उनपर काफी असर पड़ता है ख़ास कर युवाओं में।


