Tuesday, October 13

रांची: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर बुधवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अपनी दलीलें पूरी कर दी गईं। वहीं राज्य सरकार ने जांच से जुड़ी दो रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के सामने पेश कीं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जांच की समय-सीमा को लेकर राज्य सरकार से तीखे सवाल भी किए। अदालत ने पूछा कि जब मामले की जांच करीब तीन वर्षों से चल रही थी, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया जा सका? कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जांच में अचानक तेजी आने की वजह क्या है।

तीन साल से चल रही जांच पर कोर्ट ने मांगा जवाब

JSSC CGL विवाद की सुनवाई के दौरान अदालत का फोकस सिर्फ परीक्षा में कथित गड़बड़ी पर नहीं रहा, बल्कि जांच की प्रक्रिया और उसकी टाइमलाइन पर भी रहा। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर मामले में गंभीर अनियमितताओं की जांच लंबे समय से चल रही थी, तो इतने वर्षों में जांच पूरी क्यों नहीं हो सकी।

अदालत की इस टिप्पणी को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राज्य सरकार ने परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के अपने फैसले के समर्थन में जांच रिपोर्टों और कथित अनियमितताओं को आधार बनाया है।

इससे पहले भी हाईकोर्ट ने JSSC CGL समेत कुछ भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी फैसले पर अंतरिम रोक बरकरार रखी थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि नियुक्त अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

सीलबंद लिफाफे में दो रिपोर्ट, सरकार ने बताई जांच की कड़ियां

बुधवार की सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अदालत के समक्ष दो जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की गईं। सरकार की ओर से बताया गया कि जांच के दौरान JPSC से जुड़े मामले में सामने आए तथ्यों की कड़ियां JSSC CGL परीक्षा से भी जुड़ती हैं।

सरकार ने दावा किया कि जांच के दौरान ऐसे कई स्थानों की जानकारी सामने आई, जहां अभ्यर्थियों को परीक्षा के उत्तर याद या रटवाए जाने की बात सामने आई। यानी सरकार का पक्ष यह है कि कथित अनियमितता सिर्फ प्रश्नपत्र या परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को उत्तर उपलब्ध कराने और उन्हें याद कराने की प्रक्रिया से भी जुड़ी कड़ियां जांच में सामने आई हैं।

यह दावा अब मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि सरकार इसी आधार पर परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को दूषित बताते हुए उसे रद्द करने के फैसले को उचित ठहरा रही है।

याचिकाकर्ताओं की दलील पूरी, अब सरकार के पक्ष पर नजर

सुनवाई के दौरान JSSC CGL परीक्षा और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस पूरी कर ली गई। याचिकाकर्ताओं का मुख्य पक्ष यह है कि कथित गड़बड़ी के लिए दोषी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन पूरी परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को एक साथ रद्द करना उचित नहीं है।

वहीं राज्य सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितताओं की जांच सामने आई है और ऐसे में सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों को अलग करके पूरी प्रक्रिया को सही मानना संभव नहीं है। सरकार पहले भी अदालत में यह तर्क रख चुकी है कि परीक्षा पूरी तरह दूषित होने की स्थिति में उसे रद्द करना ही जनहित में उचित विकल्प है।

हजारों अभ्यर्थियों की नौकरी और भविष्य का सवाल

JSSC CGL विवाद का असर सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं है। इस परीक्षा के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां भी सरकारी फैसले से प्रभावित हुई हैं। इसी वजह से मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और अदालत ने फिलहाल नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर राहत दी है।

इस विवाद में एक तरफ कथित परीक्षा धांधली की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई का सवाल है, तो दूसरी तरफ उन अभ्यर्थियों के भविष्य का मुद्दा है, जिन्होंने परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की और खुद को निर्दोष बताया है।

दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट के एक फैसले में भी SIT को जांच पूरी करने के लिए समयसीमा दी गई थी और कथित तौर पर नेपाल ले जाकर प्रश्न-उत्तर रटवाए जाने वाले अभ्यर्थियों से जुड़े पहलुओं की जांच का निर्देश दिया गया था।

कल फिर होगी सुनवाई

बुधवार की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की बहस पूरी होने और सरकार की ओर से जांच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सौंपे जाने के बाद अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है। मामले की सुनवाई गुरुवार को सुबह 11 बजे फिर होगी।

अब देखना अहम होगा कि अदालत सीलबंद रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और तीन साल से चल रही जांच में हुई देरी को लेकर सरकार से क्या जवाब मांगती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि अदालत कथित व्यापक गड़बड़ी और निष्पक्ष तरीके से चयनित अभ्यर्थियों के हितों के बीच किस तरह संतुलन कायम करती है।

फिलहाल JSSC CGL विवाद में एक तरफ परीक्षा की कथित धांधली की जांच है, तो दूसरी तरफ हजारों अभ्यर्थियों की नौकरी और भविष्य का सवाल। अगली सुनवाई में इन दोनों पहलुओं पर कोर्ट की टिप्पणी पर सबकी नजर रहेगी।

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