Tuesday, October 13

रांची: धुर्वा स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर सेक्टर-2 की छात्रा सिद्धि सिंह इन दिनों अपने स्कूल में नामांकन के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रही है। छात्रा का आरोप है कि उसके पिता द्वारा स्कूल की बढ़ी हुई फीस और सिलेबस को लेकर आपत्ति जताने और इसकी शिकायत रांची के उपायुक्त एवं स्कूल प्रबंधन से करने के बाद स्कूल ने उसका नामांकन नहीं लिया। छात्रा के मुताबिक, इस वजह से पिछले करीब चार महीने से उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

सिद्धि सिंह ने एक वीडियो जारी कर अपनी परेशानी बताई है। वीडियो में वह कहती है कि उसका कसूर सिर्फ इतना है कि उसके पिता ने स्कूल की ओर से कथित तौर पर बढ़ाई जा रही फीस और सिलेबस का विरोध किया था। इसके बाद स्कूल में उसका एडमिशन नहीं लिया गया।

कई महीने तक स्कूल के चक्कर लगाने का दावा

सिद्धि के अनुसार, उसने लगातार दो से तीन महीने तक स्कूल जाकर बकाया फीस जमा करने और अपना नामांकन कराने की कोशिश की। उसका दावा है कि इसके बावजूद उसका नामांकन नहीं लिया गया। छात्रा ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसे मानसिक रूप से परेशान भी किया गया।

छात्रा का कहना है कि उसने अपनी समस्या को लेकर रांची के उपायुक्त, जिला शिक्षा पदाधिकारी (DSE), CBSE और अन्य संबंधित अधिकारियों से शिकायत की। इसके बावजूद अब तक उसे स्कूल में दोबारा पढ़ाई शुरू करने का रास्ता नहीं मिल पाया है।

घर पर रहने को मजबूर होने का आरोप

सिद्धि का कहना है कि स्कूल में नामांकन नहीं होने के कारण वह फिलहाल स्कूल नहीं जा रही है और घर पर ही रह रही है। उसने दावा किया कि मामले को लेकर अधिकारियों के आदेशों और निर्देशों का पालन करने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।

छात्रा ने अपने वीडियो में कहा कि लगातार स्कूल से दूर रहने के कारण उसकी पढ़ाई और भविष्य पर असर पड़ रहा है। उसने व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप करने और पढ़ाई जारी रखने का रास्ता निकालने की अपील की है।

हाईकोर्ट से इंसाफ की गुहार

सिद्धि सिंह ने झारखंड हाईकोर्ट से भी मामले में हस्तक्षेप कर उसे न्याय दिलाने की अपील की है। उसका कहना है कि किसी विवाद या शिकायत का खामियाजा एक छात्रा की पढ़ाई को नहीं भुगतना चाहिए।

हालांकि, छात्रा और उसके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर स्कूल प्रबंधन का पक्ष इस जानकारी में सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोनों पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

अब सवाल यह है कि फीस और सिलेबस को लेकर उठाए गए विवाद के बीच एक छात्रा की पढ़ाई क्यों प्रभावित हो रही है और क्या संबंधित अधिकारी उसके शैक्षणिक भविष्य को बचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं। फिलहाल सिद्धि सिंह अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए मदद की उम्मीद लगाए बैठी है।

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