धनबाद: साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच धनबाद पुलिस ने जांच की तकनीकी क्षमता मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। साइबर सुरक्षा अभियान के तहत शनिवार को धनबाद समाहरणालय स्थित पुलिस सभागार में जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से आए पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को साइबर अपराध की जांच में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल, डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और फॉरेंसिक जांच की प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि साइबर अपराध के मामलों में तकनीकी साक्ष्य किस तरह जांच की दिशा तय करने और आरोपियों तक पहुंचने में मददगार साबित हो सकते हैं।
डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की दी गई जानकारी
कार्यक्रम में मोबाइल फोन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, डिजिटल रिकॉर्ड समेत अन्य तकनीकी साक्ष्यों के महत्व पर विशेष चर्चा हुई। प्रशिक्षण के दौरान इन साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखने, उनकी जांच करने और अनुसंधान के दौरान प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की प्रक्रिया समझाई गई।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि साइबर अपराध की जांच सामान्य आपराधिक मामलों से अलग होती है। इसमें तकनीकी जानकारी के साथ-साथ डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की सही तरीके से जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है।
आधुनिक तकनीक से अपराधियों तक पहुंचने पर जोर
प्रशिक्षण में साइबर अपराध के बदलते तरीकों के अनुरूप पुलिस की जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को साइबर मामलों में अनुसंधान के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई, ताकि मामलों की जांच अधिक तेज, वैज्ञानिक और साक्ष्य आधारित तरीके से की जा सके।
साइबर अपराध बड़ी चुनौती, तकनीकी दक्षता जरूरी: DSP
धनबाद के डीएसपी सीसीआर सह साइबर प्रदीप कुमार साव ने कहा कि साइबर अपराध लगातार पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। अपराध के तरीके लगातार बदल रहे हैं, ऐसे में पुलिस अधिकारियों का तकनीकी रूप से अपडेट रहना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की बेहतर समझ से साइबर अपराध के मामलों के अनुसंधान को मजबूत किया जा सकता है और अपराधियों तक पहुंचने में पुलिस को मदद मिलेगी।
जांच को तकनीकी रूप से मजबूत करने की कोशिश
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों को साइबर अपराध की बदलती तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक इस्तेमाल की क्षमता विकसित करना है। माना जा रहा है कि तकनीकी प्रशिक्षण से साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच में पुलिस की दक्षता बढ़ेगी और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
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