रांची। जनजातीय संस्कृति, परंपरा और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 17 से 24 अगस्त तक हजारीबाग के ठाकुरबाड़ी मंदिर, बड़ा अखाड़ा परिसर में जनजातीय गौरव उत्सव का आयोजन किया जाएगा। उत्सव को लेकर रांची में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में आयोजकों ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की।
यह आयोजन महादेव स्मारक खादी ग्रामोद्योग मंडल और बिरसा मुंडा जन कल्याण योजना प्रचार अभियान के सहयोग से तथा भारत सरकार के एमएसएमई मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। आयोजन का उद्देश्य जनजातीय गौरव, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों को मंच देने के साथ महिला उद्यमियों को बाजार उपलब्ध कराना है।
चार राज्यों की महिला उद्यमी लगाएंगी स्टॉल
उत्सव में झारखंड, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिशा की महिला उद्यमियों को अपने स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री का अवसर मिलेगा। मेले में कुल 100 स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां अलग-अलग क्षेत्रों से आए उद्यमी अपने उत्पाद लोगों के सामने रखेंगे।
आयोजकों के अनुसार, पीएमएस योजना के तहत पात्र उद्यमियों को नियमानुसार प्रदर्शनी और यात्रा आदि से संबंधित सहायता सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराई जाएगी। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
18 से 22 अगस्त तक होगी प्रभु श्रीराम की कथा
जनजातीय गौरव उत्सव के दौरान धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। 18 से 22 अगस्त तक प्रतिदिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पंचदिवसीय कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा के माध्यम से लोगों को धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
12 ज्योतिर्लिंगों की झांकी बनेगी आकर्षण
उत्सव में 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकी और दर्शन की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा जनजातीय समाज के महानायकों और महापुरुषों के योगदान से लोगों को परिचित कराने के लिए जनजातीय महापुरुषों की विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और उनके लाभों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
संस्कृति के साथ रोजगार और उद्यमिता पर जोर
आयोजकों ने बताया कि जनजातीय गौरव उत्सव को केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें स्थानीय उत्पादों, महिला उद्यमिता, स्वरोजगार और बाजार से जुड़ाव को भी प्रमुखता दी जा रही है। विभिन्न राज्यों से आने वाली महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री और प्रचार का अवसर मिलेगा।
आठ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में जनजातीय संस्कृति, धार्मिक आस्था, महिला उद्यमिता और स्वदेशी उत्पादों को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलेगा। आयोजन के जरिए लोगों को स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों से जोड़ने और महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
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