रांची: सावन की दूसरी सोमवारी पर राजधानी रांची का पहाड़ी मंदिर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा। शिवभक्तों की लंबी कतारें, माथे पर भस्म, हाथों में जल और मन में बाबा भोलेनाथ के प्रति अटूट विश्वास – पूरे मंदिर परिसर में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। लेकिन इसी आस्था के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
रातू रोड के इंद्रपुरी की रहने वाली अमृता सहदेव सावन की इस सोमवारी पर घुटनों के बल चलकर पहाड़ी बाबा के दरबार पहुंचीं। उनके लिए यह केवल मंदिर तक पहुंचने की यात्रा नहीं थी, बल्कि विश्वास, संकल्प और भगवान शिव के प्रति कृतज्ञता की यात्रा थी।
मन्नत पूरी हुई तो निभाया अपना संकल्प
बताया गया कि अमृता सहदेव ने पिछले वर्ष पहाड़ी बाबा के दरबार में पुत्र प्राप्ति की मनोकामना मांगी थी। मन में एक विश्वास था और आंखों में भोलेनाथ से पूरी होने वाली उम्मीद।
समय बीता और उनकी मनोकामना पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने और अपनी मन्नत पूरी करने के लिए घुटनों के बल चलकर पहाड़ी मंदिर पहुंचने का संकल्प लिया।
सावन की दूसरी सोमवारी पर उन्होंने अपने उसी संकल्प को पूरा किया। घुटनों के बल मंदिर की ओर बढ़ती अमृता को देखकर आसपास मौजूद श्रद्धालु भी कुछ पल के लिए ठहर गए। उनके चेहरे पर थकान से ज्यादा संतोष और भक्ति की चमक दिखाई दे रही थी।
हर कदम में आस्था, हर सांस में भोलेनाथ
घुटनों के बल मंदिर की सीढ़ियां चढ़ना आसान नहीं था। रास्ते में दर्द भी था, थकान भी थी, लेकिन मन में बाबा भोलेनाथ के प्रति विश्वास इतना गहरा था कि कदम रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
यह दृश्य मानो यही संदेश दे रहा था कि जब आस्था सच्ची हो, तो रास्ते की कठिनाइयां भी छोटी लगने लगती हैं।
अमृता ने पहाड़ी बाबा के दरबार में पहुंचकर भगवान शिव को नमन किया और अपनी मन्नत पूरी होने के लिए आभार व्यक्त किया। उनके लिए यह क्षण भावुक करने वाला भी था और आध्यात्मिक रूप से बेहद खास भी।
सावन में आस्था का यह रूप बना चर्चा का विषय
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और साधना का महीना माना जाता है। इस दौरान देशभर में श्रद्धालु अलग-अलग तरीकों से भोलेनाथ की आराधना करते हैं। कोई कांवड़ लेकर मीलों पैदल चलता है, कोई उपवास रखता है, तो कोई अपनी मनोकामना पूरी होने पर भगवान के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना करता है।
रांची के पहाड़ी मंदिर में अमृता सहदेव की यह भक्ति भी उसी अटूट विश्वास की एक तस्वीर बनी—जहां मन्नत पूरी होने की खुशी ने दर्द और थकान को पीछे छोड़ दिया।
उनका यह संकल्प और बाबा के प्रति कृतज्ञता सावन की दूसरी सोमवारी पर श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बन गई।
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