रांची में बेखौफ बालू माफिया…प्रशासन मौन..स्थानीय लोग उग्र
सिल्ली से लेकर बुंडू तक पुलिस पर मिलीभगत का आरोप
चौधरी, हरदेव नामक बालू कारोबारी हर दिन निकाल रहे 25 हाईवा बालू
रांची DMO अबु हसन को राज्य के एक बड़े मंत्री का संरक्षण, इसलिए बेलगाम हैं तस्कर
रांची में इन दिनों बालू माफिया पूरी तरह बेखौफ हो गए हैं. NGT की रोक के बाद बालू माफिया और भी ज्यादा एक्टिव हो गए हैं. पूरी रांची पुलिस को अगर बदनामी मिल रही है तो बालू घाट से होने वाले बालू की तस्करी को लेकर हो रही है. पूरे् मामले में चौधरी और हरदेव का नाम सामने आ रहा है जो स्थानीय पुलिस के संरक्षण से हर दिन बालू घाट से करीब 25 हाईवा से ज्यादा बालू निकाल रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों बालू माफियाओं का थानेदार के साथ नजदीकी संबंध है जिसके कारण उसको बालू के अवैध कारोबार की पूरी छूट मिली हुई है.
इधर, सिल्ली प्रखंड के हजाम-जयनगर क्षेत्र में राढू नदी से कथित अवैध बालू उठाव को लेकर गुरुवार की रात ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया. ग्रामीणों ने नदी की ओर से बालू लेकर गांव की सड़क से गुजर रहे कई ट्रक और हाइवा वाहनों को रोक दिया. इसके बाद पुलिस प्रशासन और अंचलाधिकारी को इसकी सूचना देकर मौके पर जांच की मांग की गई.
ग्रामीणों का कहना है कि उनका मकसद किसी वाहन को रोकना नहीं, बल्कि यह पता लगाना था कि नदी से उठाया जा रहा बालू कानूनी तरीके से निकाला गया है या नहीं। ग्रामीणों ने अधिकारियों से वाहनों के कागजात, चालान, बालू के स्रोत और परिवहन की अनुमति की जांच करने की मांग की.

रांची DMO अबु हसन को राज्य के एक बड़े मंत्री का संरक्षण
स्थानीय लोगों ने मौके पर नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि रांची के DMO अबु हसन को राज्य के एक बड़े मंत्री का संरक्षण है. DMO साहब को उन मंत्री जी का रिश्तेदार बताया जाता है जिसके कारण वह सालों से रांची में जमे हुए हैं. इतना ही नहीं अभी कुछ दिनों पहले DMO साहब ने रातू थानाक्षेत्र से रात में बालू उठवाकर एक बड़े पदाधिकारी के निर्माणधीन घर के सामने गिरवा दिया था. मजेदार बात यह है कि उस बालू की नीलामी के लिए रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने आदेश भी निकाला हुआ था. DMO अबु हसन के रुतबे का ही कमाल है कि ना तो इनपर अधिकारी लगाम लगा पा रहे हैं ना ही तस्करों को बेलगाम होने से रोका जा रहा है. जितने वर्षों से अबु हसन रांची में जमे हुए हैं उनको बालू से लेकर कोयला तक के तस्करी की सूचना रहनी चाहिए. स्थानीय लोगों ने और भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
अधिकारी नहीं पहुंचे तो सड़क पर ही खाली कर दिया बालू
ग्रामीणों का आरोप है कि जब काफी इंतजार के बाद भी पुलिस प्रशासन या अंचल प्रशासन की टीम मौके पर नहीं पहुंची, तो बालू लदे वाहनों में से बालू उसी सड़क पर गिरा दिया गया. उनके अनुसार, इसके बाद खाली वाहनों को चेतावनी देकर वहां से जाने दिया गया. उनका दावा है कि रात करीब 12 बजे तक मौके पर प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई.इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब उन्होंने खुद वाहनों को रोककर प्रशासन को सूचना दी थी, तो समय रहते अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे.
बालू वैध है तो जांच से क्यों बचना ?
ग्रामीणों ने कहा कि अगर राढू नदी से बालू का उठाव नियमों के तहत किया जा रहा है तो प्रशासन को मौके पर ही वाहनों के दस्तावेजों की जांच कर स्थिति साफ करनी चाहिए. वह यह जानना चाहते हैं कि संबंधित वाहनों के पास वैध चालान, परिवहन अनुमति और बालू के स्रोत से जुड़े दस्तावेज हैं या नहीं। वहीं, अगर दस्तावेज नहीं हैं तो अवैध बालू उठाव और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए. कमोबेश पूरी रांची में इन दिनों यही खेल चल रहा है. बालू लादकर चलने वालों वाहनों को अगर स्थानीय लोग रोकते भी हैं तो DMO अबु हसन मामले को रफा दफा करने पहुंच जाते हैं.
किसकी अनुमति से रात में चल रहा बालू का कारोबार?
ग्रामीणों ने रात के समय नदी से बालू उठाने और भारी वाहनों के परिचालन पर भी सवाल खड़े किए हैं.उनका आरोप है कि नियमों के बावजूद राढू नदी क्षेत्र में अंधेरे के दौरान बालू उठाव और परिवहन का काम चल रहा है. प्रशासन से यह भी जांच करने की मांग की है कि आखिर रात में इतने बड़े वाहनों को नदी क्षेत्र तक पहुंचने और वहां से बालू लेकर निकलने की अनुमति किस स्तर से मिल रही है.
कुछ लोगों के नाम भी सामने आए, लेकिन पुष्टि नहीं
मामले को लेकर ग्रामीणों की ओर से चौधरी, हरदेव और राहुल समेत कुछ लोगों के नाम लिए गए हैं. ग्रामीणों के अनुसार, वाहन रोके जाने के दौरान राहुल मौके पर पहुंचे थे और इस दौरान ग्रामीणों के साथ बहस भी हुई. लेकिन प्रशासन की मिलीभगत के कारण कोई भी पुलिस पदाधिकारी या खनन विभाग से जुड़े लोग वहां नहीं पहुंचे जिसके जिसके कारण बालू माफिया आसानी से निकल गए.
नदी और पर्यावरण को नुकसान की भी चिंता
स्थानीय लोगो ने सिर्फ अवैध बालू उठाव की आशंका ही नहीं जताई, बल्कि इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चिंता जाहिर की है.उनका कहना है कि अगर नदी से लगातार और अनियंत्रित तरीके से बालू निकाला जाता है तो इससे नदी की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा नदी के आसपास के पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है. ग्रामीणों ने प्रशासन से राढू नदी क्षेत्र में स्थल जांच और बालू उठाव की स्थिति का सत्यापन कराने की मांग की है.
सबसे बड़ा सवाल- सूचना के बाद भी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे अधिकारी ?
इस पूरे मामले में ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की मौके पर मौजूदगी को लेकर है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने स्वयं वाहनों को रोककर पुलिस प्रशासन और अंचलाधिकारी को सूचना दी थी. इसके बावजूद उनके अनुसार देर रात तक मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. अब सवाल यह है कि अगर बालू उठाव अवैध था तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई और अगर वैध था तो वाहनों के दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
फिलहाल मामले में प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच और कार्रवाई का इंतजार है. जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि राढू नदी से किया जा रहा बालू उठाव वैध था या नियमों का उल्लंघन कर किया जा रहा था. साथ ही जांच से यह भी सामने आ सकेगा कि पूरे मामले में किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका थी या नहीं.
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