Tehran, (Iran): मध्य‑पूर्व में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयास में प्रस्तावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त ईरान को कौन देगा 300 अरब डॉलर है। यह फंड युद्ध‑से‑उभरे आर्थिक नुकसान को पाटने के लिये आवश्यक माना जा रहा है, परन्तु अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि इस विशाल राशि का भुगतान कौन करेगा।
अमेरिकी-सऊदी‑खाड़ी गठबंधन का वित्तीय प्रस्ताव
‘इस्लामाबाद एमओयू’ के अनुसार, ईरान को कौन देगा 300 अरब डॉलर की योजना अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के तीन‑दिन के खाड़ी दौरे के दौरान चर्चा का मुख्य बिंदु बन गई है। इस दस्तावेज़ में कहा गया है कि अमेरिका अपने समृद्ध खाड़ी साझेदारों – यूएई, कुवैत, बहरीन और कतर – के साथ मिलकर एक आर्थिक पैकेज तैयार करेगा, जो 60 दिनों के भीतर लागू किया जाएगा। फंड के अलावा, सभी आवश्यक वित्तीय लाइसेंस और टैक्स छूट भी प्रदान की जायेगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय लेन‑देन में कोई रुकावट न रहे।
सैन्य अड्डे और पिछले हमलों की छाया
विशेषज्ञों का मानना है कि यह राशि मूलतः खाड़ी देशों के खजाने से ही ली जाएगी, जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे स्थित हैं। इराक‑सिरिया‑लेबनान में ईरान द्वारा किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने ग़ौर किया कि कोई भी सीधा आर्थिक समर्थन देने से पहले विश्वास पुनः स्थापित करना आवश्यक है। इस कारण, वह इस फंड पर टिप्पणी करने से इनकार कर रहे हैं।
संभावित भुगतान स्रोत और भू‑राजनीति
दूसरी ओर, यूएई ने पहले ईरान से युद्ध क्षतिपूर्ति की माँग की थी, परन्तु अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण उसने अपने रुख को नरम किया। अब तब सवाल उठता है कि क्या यूएई, कतर या सऊदी अरब इस $300 बिलियन को प्रदान करने में सक्षम रहेंगे। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी करदाताओं का एक भी डॉलर सीधे ईरान को नहीं जाएगा; यह फंड खाड़ी देशों के निजी संसाधनों से जुटाया जायेगा।
खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंता
खाड़ी देशों को इस फंड से डर है कि बड़े पैमाने पर धन मिलने के बाद ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को पुनः स्थापित कर सकता है। कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई और सऊदी अरब अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सतर्क हैं। वे चाहते हैं कि अमेरिका के पास एक मजबूत सुरक्षा गारंटी हो, जिससे वे अपना खजाना ईरान को नहीं खोलेंगे।
एक उच्च‑प्राधिकरण स्रोत, BBC News, ने बताया कि इस फंड की निगरानी अमेरिका‑कतर द्वारा की जाएगी और यदि पैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकों के माध्यम से निकाले गये तो उन्हें ईरानी जनसाधारण के खाद्य और कृषि जरूरतों पर प्रयोग किया जा सकता है। लेकिन तहरीर के केंद्रीय बैंक ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिससे मध्य‑पूर्व की भू‑राजनीतिक स्थिति और जटिल हो गई है।
