रामगढ़: नवरात्र में मां दुर्गा की भक्ति के लिए श्रद्धालु अलग-अलग तरीके से पूजा-अर्चना और साधना करते हैं। इसी बीच रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र की रूपा देवी अपने कठिन धार्मिक संकल्प को लेकर चर्चा में हैं। पोचरा के झोपड़ी टोला निवासी रूपा देवी, पति राजेश राम, नौ दिनों तक नुकीली लोहे की कीलों से बने बिस्तर पर विराजमान रहकर मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। इस दौरान वह अपने पेट पर कलश धारण कर नव दुर्गा की पूजा करने में विलिंग है।
नौ दिनों तक नवदुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा
रूपा देवी की साधना नवरात्र के नौ दिनों तक चलने वाली मां दुर्गा की उपासना से जुड़ी है। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ अनुष्ठान की शुरुआत हुई। दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाएगी। इसके बाद चौथे दिन मां कूष्मांडा और पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होगी।
इसी क्रम में छठे दिन मां कात्यायनी, सातवें दिन मां कालरात्रि, आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की उपासना की जाएगी। नौ दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक परंपरा में श्रद्धालु व्रत, मंत्र-जाप और पूजा के माध्यम से मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करेंगे।
कीलों की सेज और पेट पर कलश धारण करने का संकल्प
रूपा देवी के अनुष्ठान की खास बात नुकीली लोहे की कीलों से बने बिस्तर पर नौ दिनों तक विराजमान रहना और पेट पर कलश रखकर पूजा करना है। उन्होंने बताया कि कीलों से बने इस बिस्तर का वजन करीब 12 किलोग्राम है। उनका यह संकल्प क्षेत्र में लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कठिन अनुष्ठान में स्वास्थ्य और सुरक्षा भी अहम
नुकीली कीलों पर लंबे समय तक बैठने या लेटने से चोट लगने का खतरा हो सकता है। वहीं, पेट पर कलश धारण करने के दौरान भी सावधानी जरूरी है। ऐसे अनुष्ठान में सुरक्षित व्यवस्था और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल रूपा देवी की नौ दिवसीय साधना को लेकर स्थानीय लोगों की नजरें इस अनुष्ठान पर टिकी हैं। नवरात्र के दौरान उनका यह धार्मिक संकल्प क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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