कहते हैं एक मां से बड़ी योद्धा और कोई नहीं होता…9 माह कोख में रखना, प्रसव पीड़ा बर्दाश्त करना, उसके बाद हर दिन बच्चे के साथ अपनी जिंदगी बांध कर रखना, बात बच्चों के भविष्य की हो, उनकी जिंदगी की हो तब एक मां वो कर गुजरती है जो बड़े से बड़ा शक्तिशाली इंसान नहीं कर पाता. शायद यह घटना सभी के लिए उतनी खास ना हो क्योंकि लेकिन जिस दर्द ने कविता को कमजोर कर दिया था उसी दर्द ने इतनी ताकत दे डाली कि 1600 मीटर की दौड़ महत 6 मिनट में साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ गयी. यह दौड़ नौकरी की थी..यह दौड़ भूखे बच्चों के खाने के लिए थी, यह दौड़ उनकी पढ़ाई उनके भविष्य के लिए थी.
सोमवार को मौदान में तेज धूप थी, पैरों में जूते नहीं थे और शरीर पर वही साड़ी थी, जिसे पहनकर कविता महतो रोजमर्रा की जिंदगी जीती हैं। लेकिन उस दिन उनके कदमों में एक अलग ही रफ्तार थी। सामने 1600 मीटर की दौड़ थी और पीछे था परिवार का वह सपना, जिसे पूरा करने की जिम्मेदारी अब उन्हीं के कंधों पर है।
रामगढ़ में होमगार्ड भर्ती की ट्रायल दौड़ के दौरान कविता महतो साड़ी पहनकर नंगे पांव दौड़ती नजर आई। उन्होंने 1600 मीटर की दूरी करीब 6 मिनट में पूरी कर ली। इस दौड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो कविता के हौसले और मेहनत की चर्चा होने लगी।
लेकिन कविता की कहानी सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है। इसके पीछे एक ऐसी महिला की जिंदगी है, जिसने पति की मौत के बाद अपने बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए सरकारी नौकरी का सपना देखा है।
पति की मौत के बाद बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी
जानकारी के मुताबिक, कविता महतो विधवा हैं और उनके दो छोटे बच्चे हैं। परिवार में बुजुर्ग सास-ससुर की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर है। ऐसे में परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालना और बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसी जिम्मेदारी के बीच कविता ने होमगार्ड बनने का सपना देखा। उनका मानना है कि अगर सरकारी सेवा में आने का मौका मिलता है तो वह अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगी।
यही वजह है कि वह भर्ती की तैयारी में जुटी हैं। दौड़ उनके लिए सिर्फ एक शारीरिक परीक्षा नहीं, बल्कि अपने परिवार के लिए बेहतर जिंदगी की उम्मीद भी है।
जूते नहीं थे, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ
ट्रायल के दौरान कविता जिस तरह मैदान में दौड़ीं, उसने लोगों का ध्यान खींच लिया। साड़ी में, नंगे पांव और तेज धूप के बीच उन्होंने दौड़ पूरी की। निर्धारित समय 10 मिनट है, जबकि कविता ने 1600 मीटर की दूरी करीब 6 मिनट में पूरी कर ली।
उनकी दौड़ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग उनके संघर्ष और हौसले की तारीफ कर रहे हैं। वीडियो देखने वालों के लिए शायद यह कुछ मिनटों की दौड़ है, लेकिन कविता के लिए हर कदम के पीछे अपने बच्चों और परिवार के भविष्य की चिंता और उम्मीद जुड़ी है।
284 पदों पर होनी है भर्ती
रामगढ़ जिले में होमगार्ड यानी गृह रक्षक के 284 पदों पर बहाली होनी है। इनमें 50 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। करीब 5 फीसदी पद तलाकशुदा और विधवा महिलाओं के लिए विशेष रूप से आरक्षित किए गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया के तहत शारीरिक जांच और दौड़ 24 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक होनी है। इससे पहले अभ्यर्थियों की तैयारी के लिए ट्रायल दौड़ कराई जा रही है, जिसमें कविता भी शामिल हुईं।
कविता की नंगे पांव दौड़ अब चर्चा में है, लेकिन इस कहानी की असली तस्वीर उस दौड़ के खत्म होने के बाद भी सामने आती है। क्योंकि उनके लिए 1600 मीटर का यह ट्रैक सिर्फ भर्ती मैदान नहीं है—यह उस जिंदगी की ओर जाने वाला रास्ता है, जहां वह अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने का सपना देख रही हैं।


