बोकारो: बेरमो में कोयले के अवैध खनन और तस्करी के खिलाफ अब कार्रवाई का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के निर्देशों के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने इलाके में ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान शुरू किया है। मकसद साफ है – कोयला क्षेत्रों से अवैध निकासी पर पूरी तरह रोक लगाना।

इस अभियान के तहत B&K एरिया के अमलो, करगली और चरकपनिया में CISF ने ड्रोन कैमरों और श्वान दस्ते की मदद से छापेमारी की। कार्रवाई में सैकड़ों टन अवैध कोयला और तस्करी में इस्तेमाल होने वाले दर्जनों वाहन जब्त किए गए। अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद अवैध कोयला कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप की स्थिति है।
स्थानीय पुलिस के बिना कार्रवाई से क्यों बदला पूरा खेल?
कोयला चोरी के खिलाफ होने वाली कार्रवाई में आमतौर पर CISF या CCL की टीम स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद लेती रही है। इसी प्रक्रिया में कार्रवाई की जानकारी पहले ही तस्करों तक पहुंचने और उनके सतर्क हो जाने की आशंका जताई जाती रही है।
अब CISF की रणनीति में इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई और CCL के साथ सीधे तालमेल पर जोर है। मूल रिपोर्ट के मुताबिक, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 यानी MMDR Act के तहत किए गए प्रशासनिक संशोधनों के बाद CISF को कार्रवाई के लिए अतिरिक्त अधिकार मिलने की बात सामने आई है।
14 इलाके, जहां से अलग-अलग रास्तों से निकलता है अवैध कोयला
बेरमो अनुमंडल में अवैध कोयला कारोबार का नेटवर्क पुराना बताया जाता है। तस्करी के लिए अलग-अलग इलाकों में छिपे ठिकानों और रास्तों के इस्तेमाल की बात सामने आती रही है। ऐसे में CISF की नजर अब 14 संवेदनशील इलाकों पर है।
इनमें बुडगड्डा, गोबिंदपुर अरमो और गड़के जैसे दुर्गम और छिपे हुए इलाके शामिल हैं। वहीं अरमो, गड़के, कंजकीरो और कथारा खदानों के आसपास से कोयला रिसाव के लिहाज से संवेदनशील बताए गए हैं।
दूसरी ओर बोरया बस्ती, खेतको और असनापानी से छोटी खेपों की निकासी का नेटवर्क होने की बात कही गई है। यहां साइकिल, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टर के जरिए कोयला बाहर भेजे जाने का उल्लेख है।
बोकारो थर्मल, गोबिंदपुर और पिलपिलो औद्योगिक क्षेत्र हैं, जहां औद्योगिक गतिविधियों की आड़ में कोयले की हेराफेरी की आशंका जताई गई है।
वहीं रामा हरिया के कुछ हिस्सों को कोयला सिंडिकेट का प्रमुख ट्रांजिट रूट माना जाता है। यहां से अवैध कोयले की बड़ी खेप दूसरे जिलों और राज्यों तक पहुंचाए जाने की बात सामने आई है।
अगर 14 इलाकों तक पहुंची कार्रवाई तो क्या होगा?
बेरमो में CISF की मौजूदा कार्रवाई अगर इन सभी संवेदनशील इलाकों तक लगातार पहुंचती है, तो अवैध कोयला कारोबार के अलग-अलग रास्तों पर एक साथ शिकंजा कस सकता है। इसके साथ ही अगर यही सख्ती BCCL, ECL और CCL के दूसरे कोयला क्षेत्रों में भी लगातार जारी रहती है, तो इससे कोल इंडिया लिमिटेड और सरकारी राजस्व को फायदा होने की संभावना है।
अब बड़ा सवाल यही है कि बेरमो में शुरू हुआ ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान कितनी दूर तक पहुंचता है और क्या CISF बिना किसी राजनीतिक, स्थानीय या प्रशासनिक दबाव के इसी सख्ती के साथ कार्रवाई जारी रख पाती है।


