रांची: सावन का महीना आते ही राजधानी रांची का पहाड़ी मंदिर श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बन जाता है। सावन के चौथे सोमवार को यहां कुछ ऐसा ही आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, जहां सुबह की पहली किरण के साथ ही शिवभक्तों का पहुंचना शुरू हो गया। हाथों में गंगाजल, बेलपत्र और पूजा की थाली लिए श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए कतार में खड़े नजर आए।
पहाड़ी मंदिर की ऊंचाई पर स्थित बाबा भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रही। किसी के होंठों पर ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष था, तो कोई शांत भाव से अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान शिव का स्मरण करता नजर आया। भीड़ के बीच भी श्रद्धालुओं के चेहरे पर उत्साह और मन में आस्था साफ दिखाई दे रही थी।
अरघा से जलार्पण, भक्ति में डूबे श्रद्धालु
श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए मंदिर में अरघा व्यवस्था की गई है। इसी माध्यम से भक्त बाबा भोलेनाथ को जल अर्पित कर रहे हैं। कुछ पल के इस जलार्पण के लिए श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े रहे, लेकिन चेहरे पर थकान से ज्यादा भगवान शिव के प्रति आस्था दिखाई दी।
मान्यता है कि सावन में भगवान शिव को जल अर्पित करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक संतुष्टि मिलती है। यही विश्वास श्रद्धालुओं को सुबह-सुबह पहाड़ी मंदिर तक खींच लाता है।
पूजा सामग्री से लेकर सेवा तक, हर तरफ दिखी श्रद्धा
मंदिर के आसपास का माहौल भी पूरी तरह भक्तिमय नजर आया। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से श्रद्धालुओं को निशुल्क पूजा सामग्री उपलब्ध कराई गई। सेवा भाव से जुड़े स्वयंसेवक भी लगातार लोगों की मदद करते दिखाई दिए।
इस पूरे माहौल में पूजा, सेवा और आस्था एक साथ नजर आई। कोई भगवान शिव के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहा था, तो कोई दूसरे श्रद्धालुओं की सहायता में जुटा था।
आस्था के साथ व्यवस्था का भी ख्याल
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में भीड़ को व्यवस्थित रखने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा पर भी नजर रखी जा रही है।
सावन के चौथे सोमवार पर पहाड़ी मंदिर का यह दृश्य सिर्फ श्रद्धालुओं की भीड़ की तस्वीर नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और आध्यात्मिक विश्वास के उस संगम की झलक है, जो सावन को खास बनाता है। सुबह से जारी जलार्पण के बीच पूरा मंदिर परिसर शिवभक्ति में डूबा हुआ है।
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