Tuesday, October 13

कर्रा के तिलमी स्कूल के 330 बच्चे गए थे रानी फॉल, लौटने के बाद कई बच्चों को उल्टी-दस्त और सिरदर्द की शिकायत; सीएचसी में कराया गया भर्ती

 खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड स्थित पीएम श्री उत्क्रमित मध्य सह उच्च विद्यालय, तिलमी के बच्चों के शैक्षणिक भ्रमण से लौटने के बाद अचानक कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। रविवार देर रात बच्चों में उल्टी, दस्त और सिरदर्द की शिकायत सामने आने के बाद परिजन और स्कूल के शिक्षक उन्हें लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), कर्रा पहुंचे। देर रात तक 18 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया।

बताया गया कि शनिवार को स्कूल के करीब 330 बच्चे शैक्षणिक भ्रमण पर निकले थे। बच्चों को कल्याण गुरुकुल, खूंटी होते हुए रानी फॉल ले जाया गया था। भ्रमण के दौरान बच्चों ने खाना-पीना भी किया। इसके बाद जब बच्चे वापस अपने घर पहुंचे तो रविवार की रात अचानक एक के बाद एक कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

अचानक शुरू हुई उल्टी और दस्त की शिकायत

बच्चों को मुख्य रूप से उल्टी, दस्त और सिरदर्द की शिकायत हुई। एक साथ कई बच्चों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलने के बाद अभिभावक परेशान हो गए। परिजन बच्चों को लेकर तत्काल कर्रा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी जांच शुरू की।

देर रात तक 18 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। बच्चों की हालत पर स्वास्थ्यकर्मियों की नजर बनी हुई है। फिलहाल किसी गंभीर स्थिति की सूचना सामने नहीं आई है।

खाना या पानी से तबीयत बिगड़ने की आशंका

एक साथ कई बच्चों के बीमार पड़ने के बाद खाने और पानी की गुणवत्ता को लेकर आशंका जताई जा रही है। चूंकि बच्चों ने सामूहिक रूप से शैक्षणिक भ्रमण किया था और लौटने के बाद एक साथ इस तरह की शिकायतें सामने आईं, इसलिए फूड प्वाइजनिंग या दूषित भोजन-पानी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, बच्चों की तबीयत खराब होने का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। डॉक्टरों की जांच और जरूरत पड़ने पर भोजन-पानी के नमूनों की जांच से यह पता चल सकेगा कि बीमारी की वजह क्या थी। फिलहाल इसे निश्चित तौर पर फूड प्वाइजनिंग कहना जल्दबाजी होगी।

330 बच्चों के भ्रमण के बाद बढ़ी चिंता

इस शैक्षणिक भ्रमण में स्कूल के करीब 330 बच्चे शामिल थे। ऐसे में कई बच्चों के बीमार पड़ने की घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। परिजन यह जानना चाहते हैं कि भ्रमण के दौरान बच्चों को क्या भोजन दिया गया था, पानी की व्यवस्था कहां से हुई थी और भोजन-पानी की गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं।

अब स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रबंधन के स्तर से भी इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाए जाने की जरूरत है। खासकर जिन बच्चों ने एक साथ भोजन या पानी लिया था, उनके स्वास्थ्य पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

बच्चों के इलाज के साथ कारणों की जांच जरूरी

फिलहाल प्राथमिकता बीमार बच्चों के इलाज और उनकी निगरानी की है। इसके साथ ही घटना की वजह का पता लगाना भी जरूरी है, ताकि अगर भोजन या पानी से संक्रमण की बात सामने आती है तो समय रहते अन्य बच्चों की भी जांच की जा सके।

अभिभावकों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि शैक्षणिक भ्रमण पर बड़ी संख्या में बच्चों को ले जाते समय भोजन और पेयजल की व्यवस्था कितनी सुरक्षित थी। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने के पीछे दूषित भोजन, पानी, संक्रमण या कोई अन्य कारण था।

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