Saturday, November 7

पेट और सीने में गंभीर चोट के कारण बिगड़ गई थी हालत, पारस एचईसी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने समय पर ऑपरेशन कर बचाई जान

रांची। राजधानी रांची के पारस एचईसी हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने गंभीर रूप से चाकू से घायल 23 वर्षीय युवक की जटिल सर्जरी कर उसकी जान बचाई। युवक के पेट और छाती के बाईं ओर चाकू के कई वार किए गए थे। गंभीर चोटों के कारण काफी खून बह चुका था और अस्पताल पहुंचने तक उसकी हालत बेहद नाजुक हो गई थी। जांच में पेट में छेद, डायफ्राम फटने और छाती में हवा व खून जमा होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों की टीम ने तत्काल सर्जरी का फैसला लिया। सफल ऑपरेशन और लगातार चिकित्सकीय निगरानी के बाद युवक की स्थिति में सुधार हुआ। ऑपरेशन के छठे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

गंभीर हालत में इमरजेंसी पहुंचा था युवक

अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, युवक को जब इमरजेंसी में लाया गया, तब उसकी स्थिति गंभीर थी। अधिक रक्तस्राव के कारण वह शॉक की अवस्था में था। उस समय उसका ब्लड प्रेशर 80/40 दर्ज किया गया, जबकि हृदय गति 118 से 125 प्रति मिनट के बीच थी। उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी।

प्रारंभिक चिकित्सकीय जांच और सीटी स्कैन में चोटों की गंभीरता सामने आई। डॉक्टरों ने पाया कि चाकू के वार से युवक के पेट में छेद हो गया था। इसके साथ ही छाती और पेट के बीच स्थित डायफ्राम के बाईं ओर भी गंभीर चोट थी, जिससे वह फट गया था। छाती में हवा और खून जमा होने की वजह से सांस लेने में परेशानी बढ़ रही थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए डॉक्टरों ने बिना देरी किए उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाने का निर्णय लिया।

पेट और डायफ्राम की हुई मरम्मत, चेस्ट ट्यूब से निकाला खून

मरीज का इलाज पारस एचईसी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट जनरल एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अमरेंद्र कुमार के नेतृत्व में किया गया। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पेट में हुए छेद की मरम्मत की। इसके अलावा डायफ्राम के फटे हिस्से को भी ठीक किया गया। जांच के दौरान युवक की बाईं किडनी में सतही चोट भी पाई गई।

छाती में हवा और खून जमा होने के कारण मरीज की सांस लेने की स्थिति प्रभावित हो रही थी। इसे नियंत्रित करने के लिए डॉक्टरों ने चेस्ट ट्यूब डाली और उसके माध्यम से छाती में जमा हवा और खून को बाहर निकाला। मरीज की गंभीर स्थिति और एक से अधिक अंगों में चोट को देखते हुए ऑपरेशन के बाद भी विशेष निगरानी की जरूरत थी।

दो दिन आईसीयू में रखा गया, छठे दिन मिली छुट्टी

सर्जरी पूरी होने के बाद युवक को दो दिनों तक आईसीयू में रखा गया। इस दौरान डॉक्टरों की टीम ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसे आईसीयू से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया।

इसके बाद मरीज की हालत में लगातार सुधार हुआ। वह धीरे-धीरे भोजन लेने की स्थिति में आ गया और उसकी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति स्थिर होने लगी। डॉक्टरों ने जरूरी जांच और निगरानी के बाद ऑपरेशन के छठे दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी।

समय पर इलाज से बचाई जा सकती है जान : डॉ. अमरेंद्र कुमार

डॉ. अमरेंद्र कुमार ने बताया कि गंभीर चोटों के मामलों में समय पर बीमारी और चोट की सही पहचान करना बेहद जरूरी है। ऐसे मरीजों में त्वरित सर्जिकल हस्तक्षेप के साथ ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में समय पर जांच, सर्जरी और समन्वित चिकित्सकीय देखभाल की वजह से मरीज की हालत स्थिर हो सकी और उसे सुरक्षित घर भेजना संभव हुआ।

वहीं, पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि दुर्घटनाओं और ट्रॉमा के गंभीर मामलों में मरीज को जल्द से जल्द बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलना जरूरी है। ऐसे मामलों में डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम, त्वरित निर्णय और ऑपरेशन के बाद की देखभाल मरीज की जान बचाने में अहम होती है।

उन्होंने कहा कि अस्पताल का प्रयास है कि गंभीर स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जाए। इस मामले में डॉक्टरों और मेडिकल टीम के संयुक्त प्रयास से गंभीर रूप से घायल युवक को नया जीवन मिल सका।

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