Thursday, September 24

नक्सल प्रभावित इलाकों में एक बार फिर तनाव का माहौल देखने को मिल रहा है। प्रतिबंधित नक्सली संगठन TSPC (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी) ने अपने सुप्रीमो बृजेश गंझू की वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत के विरोध में झारखंड के सात जिलों में 24 से 26 सितंबर तक तीन दिवसीय बंद का आह्वान किया है। संगठन इस मुठभेड़ को ‘फर्जी एनकाउंटर’ करार दे रहा है।

इन सात जिलों में दिख रहा बंद का असर

इस बंद का प्रभाव चतरा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार, गढ़वा, लोहरदगा और गुमला जिलों में देखा जा रहा है। ये सभी जिले नक्सल प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं, जहां ऐसे बंद का सामाजिक-आर्थिक जीवन पर सीधा असर पड़ता है।

लंबी दूरी की बसों के पहिए थमे, यात्री परेशान

बंद के डर का सबसे ज्यादा असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक चतरा बस स्टैंड पर पूरी तरह सन्नाटा छाया हुआ है। रांची, कोडरमा, लोहरदगा के साथ-साथ बिहार के गया, औरंगाबाद और पटना जाने वाली बसों का परिचालन पूरी तरह बंद है, जिससे यात्री फंसे हुए हैं और मजबूरन ऑटो व टोटो का सहारा ले रहे हैं।

शहरी इलाकों में दुकानें खुली, ग्रामीण क्षेत्रों में सन्नाटा

बंद का असर ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में ज्यादा नजर आ रहा है, जबकि लावालौंग जैसे कुछ शहरी और ब्लॉक मुख्यालयों में अधिकतर दुकानें खुली देखी गई हैं।

पुलिस अलर्ट, एसपी ने की जनता से अपील

स्थिति को देखते हुए सभी सात जिलों की पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। चतरा एसपी अनिमेष नैथानी ने आम जनता और बस ऑपरेटरों से बिना डर के अपने वाहन चलाने और दुकानें खोलने की अपील की है। पुलिस बल जगह-जगह मुस्तैद है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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