हजारीबाग/टाटीझरिया: झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड के अमनारी गांव में बारिश के बाद एक पुराने मिट्टी के मकान की दीवार ढहने से ऐसा राज सामने आया, जिसने पूरे इलाके में कौतूहल पैदा कर दिया। मलबा हटाने के दौरान दीवार के भीतर छिपाकर रखा गया मिट्टी का बर्तन टूट गया और उसमें से 300 से ज्यादा पुराने चांदी के सिक्के बाहर निकल आए।

बताया जा रहा है कि मकान काफी पुराना है और लंबे समय से एक संयुक्त परिवार के पास है। लगातार बारिश के कारण मकान की एक दीवार अचानक भरभराकर गिर गई। जब परिवार के लोग मलबा हटाने लगे, तभी दीवार के अंदर चुनकर रखा गया मिट्टी का एक बड़ा गगरा नीचे गिरा और टूट गया। इसके बाद उसमें रखे चांदी के सिक्के जमीन पर बिखर गए।
दीवार के अंदर छिपा था गगरा
परिवार के लोगों के मुताबिक, यह मकान करीब 200 साल पुराना बताया जाता है। उनका कहना है कि पूर्वजों के समय में कीमती सामान को सुरक्षित रखने के लिए घर की दीवारों या जमीन के भीतर मिट्टी के बर्तनों में छिपाकर रखा जाता था। माना जा रहा है कि बरामद सिक्के भी इसी तरह कई दशक पहले दीवार के भीतर रखे गए होंगे।
दिलचस्प बात यह है कि परिवार के सदस्यों ने सिक्कों को लेकर एक पुरानी मान्यता भी बताई है। उनका कहना है कि पहले भी इस मकान में ऐसी घटनाएं हुई हैं और सिक्कों को घर ले जाने को लेकर परिवार में डर की बात कही जाती रही है। इसी वजह से जानकारी सामने आने के बाद भी लोगों ने सिक्कों को हाथ लगाने से परहेज किया।
सिक्कों की असली कीमत और उम्र अब भी सवाल
बरामद सिक्कों को देखकर उन्हें पुराना और चांदी का बताया जा रहा है, लेकिन इनकी वास्तविक उम्र, ऐतिहासिक महत्व और बाजार मूल्य की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सिक्कों की संख्या 300 से अधिक बताई जा रही है और कुछ रिपोर्टों में इनका कुल वजन दो किलो से ज्यादा होने की बात भी सामने आई है।
घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे। स्थानीय स्तर पर प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी गई है और अब आगे की प्रक्रिया तथा सिक्कों की जांच पर नजर है।
क्या दूसरे हिस्सों में भी छिपा है खजाना?
इस घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों का ध्यान अब मकान की दूसरी पुरानी दीवारों पर भी गया है। परिवार की ओर से दावा किया गया है कि घर के अन्य हिस्सों में भी पूर्वजों द्वारा चांदी के सिक्कों से भरे बर्तन या आभूषण छिपाए जाने की बात सुनी जाती रही है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल अमनारी गांव में सबसे बड़ा सवाल यही है कि दीवार से निकले ये सिक्के आखिर कितने पुराने हैं, किस दौर के हैं और क्या मकान की दूसरी दीवारों में भी ऐसा कोई खजाना छिपा हुआ है? विशेषज्ञ जांच के बाद ही इन सिक्कों की वास्तविक पहचान और ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट हो सकेगा।



