बुढ़मू: मक्का गांव को प्रखंड मुख्यालय और आसपास के इलाकों से जोड़ने वाली सड़क पर बन रहा पुल लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। निर्माण कार्य को लेकर अब स्थानीय लोगों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। ग्रामीणों ने निर्माण में कथित अनियमितता, गुणवत्ता में कमी और जिम्मेदार लोगों की मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मामले की जानकारी संबंधित विभाग और बड़े अधिकारियों तक पहुंचाए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
ग्रामीणों के मुताबिक, करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस पुल के निर्माण में कथित तौर पर मानकों की अनदेखी की जा रही है। पुल के कुछ हिस्सों में सरिया दिखाई देने, निर्माण स्थल पर जलजमाव और गार्डवाल में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया या सस्ती सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत पहले भी की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण की जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में यह पुल लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
‘मुंशी भी पैसे के खेल में शामिल’, ग्रामीणों का गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े स्थानीय मुंशी पर भी कथित तौर पर पैसे के लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर काम की निगरानी करने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।
हालांकि, मुंशी के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो।
अधिकारियों तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल निर्माण को लेकर उनकी आपत्तियां केवल मौके तक सीमित नहीं हैं। विभागीय अधिकारियों और बड़े पदाधिकारियों तक भी मामले की जानकारी पहुंचाई गई, लेकिन इसके बावजूद निर्माण स्थल का प्रभावी निरीक्षण या कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब निर्माण कार्य को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं, तो आखिर संबंधित विभाग की ओर से स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति क्यों नहीं जांची जा रही है।
अधूरे पुल से बढ़ी ग्रामीणों की परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क मक्का गांव की लाइफलाइन है। पुल का निर्माण अधूरा रहने के कारण लोगों को बुढ़मू थाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्रखंड-अंचल कार्यालय और बाजार तक पहुंचने के लिए पहले की तुलना में काफी लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है।
जहां पहले करीब दो किलोमीटर की दूरी में लोग अपने जरूरी काम निपटा लेते थे, वहीं अब उन्हें करीब पांच से सात किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है।
ठेकेदार ने आरोपों पर दी सफाई
वहीं, निर्माण कार्य के ठेकेदार सतीश तिवारी ने ग्रामीणों की आपत्तियों पर अपनी सफाई दी है। उन्होंने कहा कि जहां ढलाई में सरिया दिखाई दे रहा है, वहां आवश्यक सुधार का काम कराया जाएगा। जलजमाव वाले हिस्से में एक अतिरिक्त लेयर का काम किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
सीमेंट को लेकर ठेकेदार ने बताया कि फिलहाल सीमेंट की कमी के कारण बांगुर सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। गार्डवाल में नदी के पत्थर के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि उसे हटाया जाना था, लेकिन बाद में उसी का इस्तेमाल गार्डवाल में किया गया। ठेकेदार ने दावा किया कि निर्धारित 18 महीने की निर्माण अवधि पूरी होने से पहले ही पुल का काम पूरा कर लिया जाएगा।
ठेकेदार ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वाले कुछ लोग पहले गार्डवाल निर्माण का काम मांग रहे थे। काम नहीं मिलने के बाद उनके द्वारा ग्रामीणों को भड़काया जा रहा है।
जांच के बाद ही साफ होगी हकीकत
फिलहाल पुल निर्माण को लेकर ग्रामीणों और ठेकेदार के दावों में अंतर नजर आ रहा है। ग्रामीण जहां गुणवत्ता और कथित वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं ठेकेदार ने निर्माण में सुधार का भरोसा देते हुए आरोपों को दूसरे कारणों से प्रेरित बताया है।
ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए संबंधित विभाग और जिला प्रशासन द्वारा स्थल निरीक्षण, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच और प्राक्कलन के अनुरूप हुए कार्य का तकनीकी सत्यापन जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए और पुल का निर्माण गुणवत्तापूर्ण तरीके से जल्द पूरा कराया जाए।
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