इस साल बिहार में आई बाढ़ ने आम जनजीवन के साथ-साथ राज्य के बुनियादी ढांचे को भी गहरी चोट पहुंचाई है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक बाढ़ से राज्य को करीब 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है। पानी उतरने के बाद राज्य सरकार नुकसान की अंतिम रिपोर्ट तैयार कर केंद्र सरकार से आर्थिक मदद की मांग करेगी।
17 जिलों में क्षतिग्रस्त हुईं सड़कें
ग्रामीण कार्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 17 जिलों में 1050 से ज्यादा ग्रामीण सड़कें बाढ़ की चपेट में आई हैं, जिनकी कुल लंबाई करीब 2000 किलोमीटर है। विभाग के शुरुआती आकलन में इन सड़कों की मरम्मत पर 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने का अनुमान है। कृषि विभाग ने अलग से करीब 270 करोड़ रुपये की फसल बर्बादी का आकलन किया है।
विभाग को जिलों से दैनिक रिपोर्ट मिल रही है। अभी ज्यादातर सड़कें पानी में डूबी हैं, इसलिए कितनी सड़कें पूरी तरह और कितनी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं, इसकी सही जानकारी पानी उतरने के बाद ही मिल सकेगी। अधिकारियों को लगातार निगरानी रखने और पानी कम होते ही मरम्मत का काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
भागलपुर, पटना और भोजपुर सबसे ज्यादा प्रभावित
सबसे ज्यादा नुकसान भागलपुर में हुआ है, जहां 151 सड़कें प्रभावित हैं। पटना में 140 और भोजपुर में 134 सड़कें पानी की चपेट में आई हैं। पटना में अकेले दानापुर की 44 सड़कें प्रभावित हैं। इनके अलावा सारण में 101, समस्तीपुर में 86, वैशाली में 82, कटिहार में 60, लखीसराय में 54, बेगूसराय में 49, मुंगेर में 48 और खगड़िया में 36 सड़कों को नुकसान पहुंचा है। अरवल, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया, पश्चिम चंपारण और अररिया में भी ग्रामीण सड़कें डूबी हैं।
पेयजल व्यवस्था पर भी मार
बाढ़ का असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा है। करीब 3800 चापाकल और नल-जल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई चापाकल लंबे समय तक पानी में डूबे रहे, इसलिए बड़ी संख्या में पुराने चापाकलों की जगह नए लगाने पड़ सकते हैं। पीएचईडी से मिली जानकारी के अनुसार, इस काम पर करीब 24.40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
प्रभावित चापाकल और नल-जल योजनाएं 75 प्रखंडों की 307 पंचायतों में हैं। भागलपुर में 760, खगड़िया में 450, पटना के पूर्वी और पश्चिमी प्रमंडल में 294, किशनगंज में 206, हाजीपुर में 136 और बेगूसराय में 134 चापाकल खराब हुए हैं। पानी उतरने के बाद सड़कों के साथ पेयजल व्यवस्था को भी पटरी पर लाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।
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