पटना स्थित बिहार म्यूजियम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी खास पहचान बनाई है। ट्रैवल गाइड Worth a Journey की दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ म्यूजियम की सूची में बिहार म्यूजियम को नौवां स्थान मिला है। खास बात यह है कि टॉप-10 में जगह बनाने वाला यह एशिया का इकलौता म्यूजियम है। इस सूची में बिहार म्यूजियम ने न्यूयॉर्क के मशहूर मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट को भी पीछे छोड़ दिया है।
बिहार म्यूजियम को उसकी आधुनिक वास्तुकला और ऐतिहासिक धरोहरों के अनूठे संग्रह के लिए यह पहचान मिली है। Worth a Journey ने इसे एक आधुनिक राजकीय संग्रहालय बताया है, जहां पाषाण काल से लेकर आधुनिक दौर तक के बिहार के इतिहास को मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों और लोक कलाओं के जरिए समझने का मौका मिलता है। विशाल परिसर, खुले आंगन और हरे-भरे लॉन के साथ यहां प्राचीन मूर्तियों की दीर्घाएं, बच्चों के लिए विशेष गैलरी और क्षेत्रीय लोक कला गैलरी भी मौजूद हैं।
इस वैश्विक सूची में –
- पहला स्थान: Museo Nacional de Antropología – मेक्सिको
- दूसरा स्थान: Museo del Prado – स्पेन
- तीसरा स्थान: Louisiana Museum of Modern Art – डेनमार्क
- चौथा स्थान: State Hermitage Museum – रूस
- पांचवां स्थान: Kunsthistorisches Museum – ऑस्ट्रिया
- छठा स्थान: Şanlıurfa Archaeology Museum – तुर्की
- सातवां स्थान: Museum of the Second World War – पोलैंड
- आठवां स्थान: National WWII Museum – अमेरिका
- नौवां स्थान: Bihar Museum – भारत
- दसवां स्थान: Metropolitan Museum of Art – अमेरिका
बिहार म्यूजियम का इतिहास और खासियत
पटना के नेहरू पथ पर स्थित बिहार म्यूजियम की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। इसे बनाने की परिकल्पना बिहार की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने के उद्देश्य से की गई थी। दरअसल, पुराने पटना म्यूजियम में हजारों ऐतिहासिक वस्तुएं मौजूद थीं, लेकिन जगह की कमी के कारण उनके एक बड़े हिस्से को प्रदर्शित करना संभव नहीं हो पा रहा था। इसी जरूरत को देखते हुए एक आधुनिक और बड़े संग्रहालय की योजना तैयार की गई। अगस्त 2015 में इसके कुछ हिस्से आम लोगों के लिए खोले गए और बाद में अक्टूबर 2017 में शेष गैलरियां भी दर्शकों के लिए खुल गईं।
करीब 13 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला यह संग्रहालय आधुनिक वास्तुकला और इतिहास का खूबसूरत संगम है। इसकी डिजाइनिंग में जापान की मशहूर वास्तुशिल्प फर्म Maki & Associates की भूमिका रही है। विशाल इमारत, खुले आंगन, हरियाली और खूबसूरती से तैयार की गई दीर्घाएं इसे एक अलग पहचान देती हैं।
यहां बिहार के इतिहास को पाषाण काल से लेकर आधुनिक दौर तक मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों, पुरातात्विक अवशेषों और लोक कलाओं के जरिए समझने का अवसर मिलता है। इतिहास की दीर्घाओं के अलावा यहां क्षेत्रीय कला, समकालीन कला और बच्चों के लिए विशेष गैलरी भी बनाई गई है। यह सिर्फ पुरानी वस्तुओं को सहेजने की जगह नहीं, बल्कि इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक जीवंत माध्यम भी है।
दुनिया के प्रतिष्ठित संग्रहालयों के बीच नौवां स्थान हासिल करना देश के लिए गर्व का विषय है।


