चतरा: शहर के दीभा मोहल्ले की जमीन की रजिस्ट्री में दस्तावेजों का ऐसा खेल सामने आया है, जिसमें एक ही रसीद नंबर पर दो अलग-अलग होल्डिंग दर्ज हैं। जमीन एक वार्ड की, होल्डिंग दूसरे वार्ड की और वंशावली जारी करने वाले पार्षद का वार्ड भी अलग! इन दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में सात जमीनों की रजिस्ट्री कर दी गई। नगर परिषद के टैक्स विभाग ने होल्डिंग रसीद में छेड़छाड़ की पुष्टि की है। इसके बावजूद निबंधन की प्रक्रिया पूरी होने और अब म्यूटेशन के लिए आवेदन किए जाने से नगर परिषद, निबंधन कार्यालय और अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

दीभा मोहल्ला निवासी जमीन मालिक नीरज सिन्हा और राहुल देव ने इस पूरे मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों से शिकायत की है। उनका कहना है कि उनकी खतियानी जमीन पर भू-माफियाओं ने फर्जी दस्तावेज तैयार कराए, दूसरे जिले में पावर ऑफ अटॉर्नी बनवाई और फिर चतरा निबंधन कार्यालय में जमीन की रजिस्ट्री करा दी।
एक ही रसीद नंबर पर दो अलग-अलग होल्डिंग
मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य होल्डिंग रसीद से जुड़ा है। रजिस्ट्री में प्रस्तुत रसीद संख्या 269558611072025062417 में होल्डिंग संख्या 0070000861000A3 सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर 11 जुलाई 2025 को जारी दिखाई गई है। वहीं, इसी रसीद संख्या पर होल्डिंग संख्या 0200000861000A3 वार्ड संख्या 20 की निवासी फूलवा देवी के नाम पर भी दर्ज है।

दोनों रसीदों में राजस्व राशि और राजस्व वर्ष समान हैं। जमीन मालिकों के अनुसार, फूलवा देवी के नाम पर जारी मूल होल्डिंग रसीद में नाम और होल्डिंग संख्या के कुछ अंक बदलकर सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम से दूसरी रसीद तैयार की गई। नगर परिषद के टैक्स विभाग ने भी दस्तावेजों में छेड़छाड़ की पुष्टि की है।
इसी दस्तावेज के आधार पर दूसरे जिले में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई। इसके बाद चतरा निबंधन कार्यालय में एक ही दिन अलग-अलग दस्तावेजों के आधार पर सात जमीनों की रजिस्ट्री हुई।
वार्ड छह के पार्षद ने जारी की वंशावली, जमीन और होल्डिंग दूसरे वार्ड के
रजिस्ट्री में इस्तेमाल की गई वंशावली भी सवालों के घेरे में है। यह वंशावली वार्ड संख्या छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा के लेटरहेड पर जारी की गई है। जबकि संबंधित जमीन वार्ड छह के अंतर्गत नहीं आती और रजिस्ट्री कराने वाले सत्येंद्र कुमार सिन्हा भी वार्ड छह के निवासी नहीं हैं। वहीं, रजिस्ट्री में प्रस्तुत होल्डिंग वार्ड संख्या सात का बताया गया है।
जमीन मालिकों ने इस दस्तावेज को नियमों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि इसी वंशावली के आधार पर पावर ऑफ अटॉर्नी और जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। ऐसे में सवाल है कि जमीन, होल्डिंग और संबंधित व्यक्ति का पता अलग-अलग वार्डों से जुड़ा होने के बावजूद दस्तावेजों का सत्यापन कैसे किया गया?
पहले शिकायत, फिर भी सात रजिस्ट्रियां; अब म्यूटेशन की तैयारी
इस मामले में एक और अहम बात यह है कि जमीन मालिकों ने रजिस्ट्री से पहले ही सब रजिस्ट्रार, सीओ, एसडीओ, एलआरडीसी, अपर समाहर्ता और उपायुक्त को लिखित शिकायत दी थी। इसके बावजूद जमीन का निबंधन हो गया। अब संबंधित जमीन के म्यूटेशन के लिए भी आवेदन किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जमीन मालिकों ने निबंधन कार्यालय और अंचल कार्यालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़, कूटरचना और जालसाजी में शामिल लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। इसमें संबंधित अधिकारी, कर्मचारी, क्रेता-विक्रेता और भू-माफियाओं की भूमिका की जांच की मांग भी शामिल है।
कौन हैं सत्येंद्र कुमार सिन्हा, जिनके नाम पर हुई रजिस्ट्री?
जमीन मालिक राहुल देव के अनुसार, सत्येंद्र कुमार सिन्हा उर्फ सतन लाल उनके गोतिया हैं और वर्तमान में शहर के अव्वल मोहल्ला इलाके में रहते हैं। राहुल देव का कहना है कि सतन लाल के परिवार को पहले ही उनके हिस्से की जमीन दी जा चुकी है। उनकी मां ने अपने हिस्से की कुछ जमीन अन्य लोगों को बेची भी थी।
राहुल देव ने बताया कि वर्ष 2004 और उससे पहले सत्येंद्र कुमार सिन्हा की मां राम कुमारी देवी ने अपने हिस्से की कुछ जमीन उनके वंशजों के नाम लिख दी थी। उस दस्तावेज में सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने गवाह के रूप में हस्ताक्षर भी किए थे। राहुल देव के मुताबिक, वर्तमान में संबंधित जमीन पर उनका कब्जा है और वे वहां खेती कर रहे हैं। जमीन का लगान भी नियमित रूप से जमा होता रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि पहले से जमीन के बंटवारे और दस्तावेजों की जानकारी होने के बावजूद सत्येंद्र कुमार सिन्हा के नाम पर दूसरी प्रक्रिया के तहत जमीन की रजिस्ट्री कैसे कराई गई।
निबंधन पदाधिकारी बोले- दस्तावेजों की जांच के बाद ही होती है रजिस्ट्री
मामले पर अवर निबंधन पदाधिकारी संतोष रजक ने कहा कि बिना दस्तावेजों की जांच के किसी भी जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती। निबंधन से पहले भूमि से संबंधित कागजातों की कार्यालय स्तर पर गहन जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि यदि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कार्यालय को गुमराह कर रजिस्ट्री कराई गई है, तो यह गंभीर मामला है। दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद वह विस्तृत जानकारी दे पाएंगे। पैसे के लेन-देन और भ्रष्टाचार के आरोपों को उन्होंने बेबुनियाद बताया और जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
SIR के लिए वंशावली बनाने की बात कही थी: वार्ड पार्षद
वार्ड संख्या छह के पार्षद दीपक कुमार वर्मा ने बताया कि सत्येंद्र कुमार सिन्हा ने SIR में नाम देने के लिए वंशावली बनाने की बात कही थी। उनके द्वारा दिए गए खतियान को देखकर उन्होंने वंशावली तैयार कर दी थी। पार्षद ने कहा कि इसके अलावा इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि वह पहले से जानते हैं कि सत्येंद्र कुमार सिन्हा दीभा मोहल्ले में आते-जाते रहे हैं।
अपर समाहर्ता ने दिया जांच और कार्रवाई का भरोसा
अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह विभागीय कार्य से मुख्यालय से बाहर हैं। शनिवार को चतरा लौटने के बाद प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन कर मामले की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
अपर समाहर्ता ने यह भी बताया कि जमीन मालिक की ओर से पहले ही गड़बड़ी की आशंका जताते हुए शिकायत प्राप्त हुई थी। इसे आगे की कार्रवाई के लिए अंचल कार्यालय और निबंधन पदाधिकारी के पास भेजा गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि होल्डिंग रसीद में छेड़छाड़ की पुष्टि होने के बाद भी सात रजिस्ट्रियां कैसे पूरी हुईं? पहले से शिकायत मिलने के बावजूद दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर हुई? प्रशासनिक जांच में इन सवालों के जवाब और पूरे मामले की जिम्मेदारी तय होना बाकी है।


