झारखंड सरकार ने राज्य के आवासीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-शिक्षिकाओं के हित में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय सहित प्रदेश के सभी आवासीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। इसके तहत संविदा शिक्षक-शिक्षिकाओं के मानदेय में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जबकि अंशकालीन शिक्षकों के मानदेय में प्रतिमाह एक हजार रुपये की वृद्धि की जाएगी।

राज्य कार्यकारिणी समिति ने दी मंजूरी
समग्र शिक्षा अभियान की मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य कार्यकारिणी समिति ने इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है, हालांकि इसके साथ यह शर्त भी जोड़ी गई है कि इस पर सक्षम प्राधिकार से भी अनुमोदन लेना होगा। यानी वित्त विभाग की अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही बढ़ा हुआ मानदेय लागू हो सकेगा।
कस्तूरबा विद्यालयों की शिक्षिकाओं को सीधा फायदा
राज्य के कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में कक्षा आठ तक पढ़ाने के लिए फिलहाल 1,015 शिक्षिकाएं अनुबंध के आधार पर कार्यरत हैं। मौजूदा समय में इनके मानदेय पर सरकार को सालाना 3,410 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। 10 प्रतिशत मानदेय बढ़ने से यह खर्च सालाना 341 लाख रुपये और बढ़ जाएगा। इसके अलावा कक्षा नौ से 12वीं तक पढ़ाने वाली 1,015 अंशकालीन शिक्षिकाओं को अभी 14,400 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसमें एक हजार रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी।
अन्य आवासीय विद्यालयों के शिक्षकों को भी मिलेगा लाभ
इसी क्रम में झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों में कार्यरत 456 अंशकालीन शिक्षिकाओं का मानदेय भी बढ़ाया जाएगा। इन्हें वर्तमान में 13,200 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं, जो बढ़कर 14,200 रुपये हो जाएंगे। वहीं नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय में तैनात 78 शिक्षकों को अब 12 हजार रुपये के बदले 13 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।
सरकार पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ, फिर भी बढ़ेगा खर्च
गौर करने वाली बात यह है कि कस्तूरबा विद्यालयों की राशि समग्र शिक्षा अभियान के तहत ही स्वीकृत है, इसलिए इस हिस्से में राज्य सरकार पर सीधा अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन समग्र रूप से मानदेय वृद्धि से सरकार पर सालाना 851.95 लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार आएगा, जिसे राज्य बजट से वहन किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से हजारों शिक्षक-शिक्षिकाओं को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे थे।



