वियतनाम में मोटरसाइकिल दुर्घटना में जान गंवाने वाले रांची के युवक राजा कुमार वर्मा के पार्थिव शरीर को भारत लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। राज्य सरकार ने इस मामले में विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास को ई-मेल भेजकर मदद मांगी है। प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने वियतनाम की राजधानी हनोई स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधा है। ई-मेल के जरिए दूतावास को घटना की पूरी जानकारी दी गई है और राजा के पार्थिव शरीर को रांची लाने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। दूतावास स्तर पर सहयोग मिलने से स्थानीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

समाजसेवी ने भी लगाई गुहार
इधर रांची के समाजसेवी ज्योति शर्मा ने भी कौंसुलेट जनरल ऑफ इंडिया को ई-मेल और व्हाट्सएप के जरिए शव वापस लाने की गुहार लगाई है। उनके मुताबिक एम्बेसी की ओर से आश्वासन दिया गया है कि राजा के शव को दो से तीन दिन के भीतर देश वापस लाया जाएगा।
कानूनी प्रक्रिया में लग सकता है समय
बताया गया है कि वियतनाम में सड़क दुर्घटना के मामलों में स्थानीय स्तर पर कई कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। इन्हें पूरा होने में आठ से 10 दिन तक का समय लग सकता है, यानी शव को भारत लाने में कुछ दिनों की देरी संभव है। इसी को देखते हुए प्रवासी नियंत्रण कक्ष ने विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप का आग्रह किया है, ताकि प्रक्रिया जल्द पूरी हो और परिजन अंतिम संस्कार कर सकें।
20 लाख के खर्च पर दावे अलग-अलग
परिवार का कहना है कि शव को भारत और रांची लाने में कम से कम 20 लाख रुपये का खर्च आएगा, जो उनके सामर्थ्य से बाहर है। हालांकि ज्योति शर्मा के अनुसार एम्बेसी की ओर से ऐसी कोई बात नहीं कही गई है।
गरीबी में जी रहा परिवार
राजा का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। पिता मजदूर हैं, भाई-बहन पढ़ाई कर रहे हैं और घर फूस का बना है, जिसकी छत बारिश में टपकती है। माता-पिता बेटे के अंतिम दर्शन के लिए हर संभव कोशिश करते हुए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
सरकार से उम्मीद
बेटे की मौत से परिवार और परिचितों में शोक का माहौल है। परिजनों की उम्मीदें पूरी तरह विदेश मंत्रालय और राज्य व केंद्र सरकार की मदद पर टिकी हैं। उन्हें भरोसा है कि सरकारी प्रयासों से कानूनी औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी और राजा का पार्थिव शरीर स्वदेश लाया जा सकेगा, ताकि माता-पिता और भाई-बहन उसके अंतिम दर्शन कर सकें।


