JPSC परीक्षा में FRO के पद के लिए 350 से अधिक और ACF परीक्षा में 150 से अधिक कैंडिडेट के ओ.एम.आर. शीटों में फर्जीवाड़ा कर उन्हें पास कराया गया। पी.टी. पास कराने के लिए 5 लाख और अंतिम चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपये की हुई वसूली हुई। यह खुलासा सीआईडी ने अदालत के समक्ष आरोपी बज्र कुमार राम की जमानत याचिका के विरोध में दायर की है।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और पेपर लीक मामले में सिविल कोर्ट रांची (ए.जे.सी.-1, श्री योगेश कुमार की अदालत) ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने सी.आई.डी. थाना कांड संख्या 16/2026 में अभियुक्त ब्रज कुमार राम की नियमित जमानत याचिका (MCA No. 2112/2026) को खारिज कर दिया है। अदालत के इस आदेश के बाद परीक्षा में संगठित सिंडिकेट, ओ.एम.आर. शीटों में हेरफेर, और इंटरव्यू में नंबर बढ़ाने के खेल की कई चौंकाने वाली परतें सामने आई हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला बी.एन.एस. (BNS) की संगीन धाराओं तथा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण एवं रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 की धारा 12(2)/12(3) के तहत दर्ज किया गया था। अभियुक्त ब्रज कुमार राम 17 अगस्त 2026 से न्यायिक हिरासत में है।
अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि वह केवल JPSC की एक सदस्य का व्यक्तिगत सहायक (PA) था और उसका परीक्षाओं के आयोजन, चयन या परिणाम तैयार करने पर कोई नियंत्रण नहीं था। साथ ही, प्राथमिक प्राथमिकी (FIR) में उसका नाम नहीं होने तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए जमानत देने और रिम्स (RIMS) स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया था।
सी.आई.डी. का खुलासा: 5 से 25 लाख में बिकती थीं नौकरियां
अदालत के समक्ष सी.आई.डी. और राज्य के विद्वान लोक अभियोजक ने केस डायरी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जमानत का जोरदार विरोध किया। सी.आई.डी. की जांच में सामने आया कि राज्य में सरकारी नौकरियों के नाम पर एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय था:
ओ.एम.आर. शीट में बड़े पैमाने पर हेरफेर: फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) मुख्य परीक्षा में 350 से अधिक और असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) परीक्षा में 150 से अधिक ओ.एम.आर. (OMR) शीटों में अनुचित तरीके से हेरफेर और रंगने का काम किया गया था।
रेट कार्ड निर्धारित था: अभ्यर्थियों से प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास कराने के नाम पर 5 लाख रुपये और अंतिम चयन (Final Selection) सुनिश्चित करने के लिए 10 से 25 लाख रुपये तक की वसूली की जाती थी।
इंटरव्यू में बढ़ाए गए अंक
अभियुक्त ब्रज कुमार राम ने स्वीकार किया कि उसने JPSC सदस्य के माध्यम से अभ्यर्थी मनीष कुमार के इंटरव्यू में 80 अंक बढ़वाए, जिससे उसका चयन डी.एस.पी. (Dy. SP) के पद पर हुआ। इसके एवज में 5 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।
सी.डी.पी.ओ. (CDPO) परीक्षा में धांधली: बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) परीक्षा में प्रति अभ्यर्थी 20 लाख रुपये की दर से 4 अभ्यर्थियों की सेटिंग कराई गई और चारों को सफल घोषित कराया गया।
ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से साठगांठ और सीक्रेट लीक
जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि जिस एजेंसी (मेसर्स टी.एस.आर. डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड – TDPL) को JSSC ने मई 2025 में 3 साल के लिए ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) कर दिया था, उसी कंपनी को JPSC के अधिकारियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत बिना निविदा के सीधे काम सौंप दिया। इस एजेंसी के कंप्यूटरों से गोपनीय दस्तावेज जैसे फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं बरामद की गईं। इतना ही नहीं, उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता द्वारा सिविल सेवा पी.टी. परीक्षा 2026 की आधिकारिक उत्तर कुंजी (Answer Key) परिणाम जारी होने से पहले ही वॉट्सऐप के जरिए एजेंसी के कर्मचारियों को भेजी गई थी।
इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना टी.डी.पी.एल. का मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी था। एजेंसी का कर्मचारी होने के बावजूद उसने खुद भी JPSC और JSSC की कई परीक्षाओं (जैसे PGTTCE-2023, JSSC-CGL-2023 में रैंक-2, ACF, FRO) में अवैध तरीके से सफलता प्राप्त की थी।
डिजिटल साक्ष्य और सी.डी.आर. ने खोली पोल
सी.आई.डी. द्वारा जब्त किए गए मोबाइल फोनों के फॉरेंसिक विश्लेषण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) से पता चला है कि अभियुक्त ब्रज कुमार राम परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, बाहरी एजेंसियों के निदेशकों और 14वीं JPSC PT परीक्षा में सफल 6 अभ्यर्थियों के साथ सीधे संपर्क में था। इसके अतिरिक्त वित्तीय लेन-देन, मिजोरम में बैठकों और नकद राशि के आदान-प्रदान के ठोस साक्ष्य भी सी.आई.डी. ने अदालत के समक्ष रखे।
अदालत की सख्त टिप्पणी: युवाओं के भविष्य से खिलवाड़
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का गहन अध्ययन करने के बाद अदालत ने माना कि यह मामला केवल एक व्यक्तिगत सहायक (PA) के सामान्य कृत्य का नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले (राजस्थान राज्य बनाम इंद्रराज सिंह एवं अन्य, 2025 INSC 341) का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि:
”सरकारी भर्ती परीक्षाओं में संगठित धांधली और पेपर लीक योग्य और मेधावी अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। यह आम जनता के विश्वास को तोड़ता है और राज्य की व्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है। ऐसे मामलों में केवल जेल में बिताया गया समय या आपराधिक इतिहास न होना जमानत का आधार नहीं बन सकता।”
झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2023 की धारा 22(b) की कठोर शर्तों का पालन न होने के कारण अदालत ने अभियुक्त ब्रज कुमार राम की जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया


