अगले कुछ दिनों में मौसम में दिखेगा बदलाव, बारिश की गतिविधियां होंगी कमजोर
रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अब धीरे-धीरे विदाई की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। सितंबर के आखिरी दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश और बादलों का दौर देखने को मिला, लेकिन अब मौसम के मिजाज में बदलाव के संकेत मिलने लगे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में राज्य में बारिश की गतिविधियां कम होने और मौसम के अपेक्षाकृत शुष्क होने की संभावना है।

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के आसपास बने मौसम तंत्र का असर अब कमजोर पड़ रहा है। इसके साथ ही वातावरण में नमी और बारिश की गतिविधियों में कमी आने लगी है। ऐसे हालात मॉनसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार कर सकते हैं।
झारखंड में बारिश की गतिविधि होगी कमजोर
राज्य के कई जिलों में अब आसमान साफ रहने की संभावना है। हालांकि, मॉनसून की विदाई का मतलब यह नहीं है कि पूरे झारखंड में एक साथ बारिश पूरी तरह बंद हो जाएगी। कुछ स्थानों पर स्थानीय मौसम परिस्थितियों के कारण हल्की बारिश या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।
भारतीय मौसम विभाग के 30 सितंबर के पूर्वानुमान में 1 से 6 अक्टूबर तक झारखंड के लिए किसी विशेष मौसम चेतावनी की बात नहीं कही गई है।
तापमान में भी हो सकता है बदलाव
बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ ही दिन के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। वहीं, सुबह और रात के समय मौसम में हल्की ठंडक महसूस होने की शुरुआत हो सकती है। खासकर खुले और ग्रामीण इलाकों में दिन-रात के तापमान के अंतर का असर अधिक महसूस हो सकता है।
इस बार कब पूरी तरह विदा होगा मॉनसून?
मॉनसून की वापसी किसी एक दिन में पूरे राज्य से नहीं होती। मौसम विभाग इसके लिए बारिश की गतिविधि में लगातार कमी, निचले स्तर पर हवाओं के बदलाव और वातावरण में नमी घटने जैसे कई संकेतों को देखता है। IMD के अनुसार, मॉनसून की आगे की वापसी के लिए इन परिस्थितियों का लगातार बने रहना जरूरी होता है।
ऐसे में झारखंड में आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अगर बारिश की गतिविधियां इसी तरह कमजोर रहती हैं, तो राज्य में मॉनसून की आधिकारिक विदाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
फिलहाल झारखंडवासियों को लगातार बारिश से राहत मिलने के संकेत हैं और मौसम धीरे-धीरे पोस्ट-मॉनसून दौर की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।


