रांची। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में 9वें दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय से शिक्षा पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए उनके शैक्षणिक सफर के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आया। इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं और उनके परिजनों में उत्साह का माहौल रहा।
समारोह में शिल्पी नेहा तिर्की की मौजूदगी भी चर्चा में रही। कार्यक्रम के दौरान कृषि शिक्षा, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और राज्य में कृषि के क्षेत्र को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया। दीक्षांत समारोह में डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह दिन लंबे शैक्षणिक सफर के पूरा होने का अवसर रहा।
हालांकि, समारोह के बीच कुछ छात्रों ने रोजगार और कृषि विभाग में नियुक्तियों से जुड़े सवाल भी उठाए। छात्रों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी उनके सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध नहीं हैं।
जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रीडिंग के पीजी छात्र अभिजीत कुमार ने कहा कि वर्ष 2004 से 2026 तक यानी करीब 22 वर्षों में कृषि क्षेत्र में बड़ी नियमित भर्ती नहीं हुई है। उनके अनुसार, बीच-बीच में कुछ पदों पर नियुक्तियां जरूर हुईं, लेकिन बड़े स्तर पर भर्ती नहीं होने से कृषि विषय से पढ़ाई करने वाले युवाओं के सामने रोजगार का संकट बना हुआ है।
कृषि विज्ञान केंद्रों में भी पद खाली होने का दावा
छात्रों ने दावा किया कि राज्य के अलग-अलग जिलों में संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों में भी कई महत्वपूर्ण पद खाली हैं। इनमें सब्जेक्ट मैटर स्पेशलिस्ट, असिस्टेंट प्रोफेसर और फील्ड ओवरसीयर जैसे पद शामिल हैं।
छात्रों का आरोप है कि एक ओर इन संस्थानों में पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी एक्सटेंशन दिया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि यदि रिक्त पदों पर नई नियुक्तियां की जाएं तो कृषि क्षेत्र में पढ़ाई कर चुके युवाओं को रोजगार मिल सकता है और उनकी विशेषज्ञता का उपयोग राज्य के कृषि विकास में किया जा सकता है।
अभिजीत कुमार ने कहा कि कई विद्यार्थी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। उनके पास योग्यता होने के बावजूद रोजगार के अवसर सीमित हैं। छात्रों का कहना है कि वे दूसरे राज्यों में जाने के बजाय अपने राज्य में रहकर कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में योगदान देना चाहते हैं।
दीक्षांत समारोह में काली पट्टी बांधकर छात्रों ने जताया विरोध
इसी मुद्दे को लेकर 9वें दीक्षांत समारोह के दौरान कुछ छात्रों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने कहा कि दीक्षांत समारोह उनके लिए खुशी का दिन है, लेकिन डिग्री हासिल करने के बाद रोजगार की स्थिति को लेकर उनके मन में चिंता भी है।
छात्रों ने सवाल उठाया कि हर साल विश्वविद्यालय से बड़ी संख्या में विद्यार्थी कृषि की डिग्री लेकर निकलते हैं, लेकिन उनके लिए नियमित सरकारी नियुक्तियों के अवसर कितने हैं। छात्रों के अनुसार, वर्तमान में उन्हें पर्याप्त नियमित वैकेंसी दिखाई नहीं दे रही है।
विरोध को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती भी की गई थी। छात्रों ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी समस्या को आम लोगों और सरकार तक पहुंचाना है, ताकि कृषि और विज्ञान के क्षेत्र में पढ़े-लिखे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।


