टंडवा/केरेडारी: चंद्रगुप्त कोयला परियोजना से निकलने वाले कोयला ढुलाई ट्रकों से टंडवा-केरेडारी सीमा क्षेत्र में अवैध वसूली का मामला गरमा गया है। बुकरू के पास कोयला ढुलाई सड़क पर ट्रक चालकों से पैसे लेने के आरोपों के बीच इंटेलिजेंस विभाग के सक्रिय होने की भी चर्चा है।
300 रुपये प्रति ट्रक वसूली का आरोप
स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी और कुछ ट्रक चालकों के दावों के अनुसार, बुकरू के पास से प्रतिदिन करीब 300 से 400 कोयला ढुलाई ट्रक गुजरते हैं। आरोप है कि प्रत्येक ट्रक से पर 300 रुपये लिए जाते हैं। यदि 300 ट्रकों से प्रतिदिन 300 रुपये वसूले जाने के दावे को आधार माना जाए, तो यह रकम रोजाना 90 हजार रुपये होती है। इसी अनुमान के हिसाब से 30 दिनों में रकम 27 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
400 ट्रकों से प्रतिदिन इतनी ही राशि लिए जाने की स्थिति में यह आंकड़ा 1.20 लाख रुपये प्रतिदिन और 30 दिनों में 36 लाख रुपये होगा। हालांकि, ट्रकों की वास्तविक संख्या, वसूली की नियमितता और रकम के इस्तेमाल या बंटवारे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
टंडवा और केरेडारी के कुछ लोगों पर आरोप
स्थानीय चर्चाओं में टंडवा और केरेडारी क्षेत्र के कुछ लोगों पर युवकों के माध्यम से ट्रक चालकों से पैसे वसूल करवाने का आरोप लगाया जा रहा है। यह दावा भी किया जा रहा है कि से मिलने वाली रकम दोनों क्षेत्रों के संबंधित लोगों के बीच बराबर बांटी जाती है।
इधर, इंटेलिजेंस विभाग की ओर से बुकरू के पास गतिविधियों और कथित वसूली में शामिल लोगों की भूमिका की जानकारी जुटाए जाने की चर्चा है। इस संबंध में विभाग का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
ग्रामीणों ने ट्रक चालकों से की शिकायत करने की अपील
मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने ट्रक मालिकों और चालकों से अपील की है कि यदि कोई जबरन पैसे मांगता है, तो वे दबाव में आकर भुगतान करने के बजाय संबंधित अधिकारियों से शिकायत करें। ग्रामीणों ने सुरक्षित तरीके से साक्ष्य जुटाकर प्रशासन और मीडिया तक जानकारी पहुंचाने की भी अपील की है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोयला ढुलाई मार्ग पर यदि अवैध वसूली हो रही है, तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि ट्रक मालिकों और चालकों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
फिलहाल, मामले में वसूली की पुष्टि, संबंधित लोगों की पहचान और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब देखना होगा कि शिकायतों और आरोपों की जांच के बाद संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।
