Friday, October 2

कांके की ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री को फिर से शुरू करने की तैयारी, तकनीकी अड़चनों से लेकर आधुनिक सुविधाओं तक पर मंत्री ने अधिकारियों से की चर्चा

रांची के कांके स्थित ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री को फिर से सक्रिय करने की दिशा में सरकार ने कवायद तेज कर दी है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सोमवार को फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फैक्ट्री की मौजूदा स्थिति का जायजा लिया और इसके पुनर्जीवन में आ रही तकनीकी, प्रशासनिक समेत अन्य बाधाओं की जानकारी अधिकारियों से ली।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ फैक्ट्री को दोबारा शुरू करने की संभावनाओं और इसके लिए जरूरी प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने लंबित कार्यों और आवश्यक अनुमतियों की भी समीक्षा की। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन कार्यों के लिए जरूरी क्लियरेंस पहले ही उपलब्ध हैं, उन्हें बिना किसी अनावश्यक देरी के तेजी से पूरा किया जाए, ताकि फैक्ट्री के पुनर्जीवन का काम जमीन पर जल्द दिखाई दे।

NMRI के विशेषज्ञों ने भी फैक्ट्री की तकनीकी स्थिति का लिया जायजा

बेकन फैक्ट्री के निरीक्षण के दौरान हैदराबाद स्थित National Meat Research Institute (NMRI) से पहुंचे विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम भी मौजूद रही। मंत्री ने विशेषज्ञों के साथ फैक्ट्री की तकनीकी स्थिति को लेकर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में फैक्ट्री की मौजूदा मशीनरी, तकनीकी खामियों, आवश्यक सुधार, आधुनिक सुविधाओं और भविष्य की कार्ययोजना जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों से यह समझने का प्रयास किया गया कि फैक्ट्री को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप किस तरह आधुनिक बनाया जा सकता है और इसे दोबारा संचालित करने के लिए किन तकनीकी सुधारों की आवश्यकता होगी।

फैक्ट्री के पुनर्जीवन के लिए तकनीकी पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों की राय और तकनीकी मूल्यांकन के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार किए जाने की दिशा में चर्चा हुई।

कभी एशिया के प्रमुख मीट प्रोसेसिंग सेंटरों में थी पहचान

निरीक्षण के दौरान मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बेकन फैक्ट्री के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान सिर्फ एक पुरानी फैक्ट्री नहीं है, बल्कि झारखंड के कृषि और पशुपालन क्षेत्र के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत है।

मंत्री के मुताबिक, एक समय बेकन फैक्ट्री को एशिया के प्रमुख मीट प्रोसेसिंग सेंटरों में गिना जाता था। इसके संचालन से किसानों और पशुपालकों को भी लाभ मिलता था तथा इससे जुड़े कई लोगों की आजीविका इससे प्रभावित होती थी।

हालांकि कूलिंग सिस्टम में आई तकनीकी खराबी के बाद फैक्ट्री लंबे समय से बंद है। इसके बंद रहने का असर फैक्ट्री से जुड़े किसानों, पशुपालकों और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा है।

लंबित प्रक्रियाओं में तेजी लाने का निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से फैक्ट्री को दोबारा शुरू करने की राह में आने वाली सभी प्रमुख अड़चनों की जानकारी ली। तकनीकी अनुमतियों, लंबित प्रक्रियाओं और विभागीय स्तर पर सामने आ रहे विषयों की भी समीक्षा की गई।

मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन कार्यों के लिए जरूरी मंजूरी उपलब्ध है, उन्हें जल्द पूरा किया जाए। उनका जोर इस बात पर रहा कि कागजी प्रक्रियाओं के कारण उन कार्यों में अनावश्यक देरी न हो, जिन्हें तत्काल शुरू किया जा सकता है।

किसानों और पशुपालकों से जुड़ी है फैक्ट्री

बेकन फैक्ट्री के पुनर्जीवन को केवल एक बंद औद्योगिक इकाई को फिर से शुरू करने के रूप में नहीं देखा जा रहा है। इसका सीधा संबंध कृषि और पशुपालन क्षेत्र से भी है। फैक्ट्री के संचालन से पशुपालकों के लिए बाजार और प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

अब सरकार और विभागीय स्तर पर तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट, आवश्यक सुधार और लंबित अनुमतियों के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी। निरीक्षण के बाद यह उम्मीद बढ़ी है कि वर्षों से बंद पड़ी कांके की ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री को दोबारा सक्रिय करने की दिशा में जल्द ठोस कदम दिखाई दे सकते हैं।

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