रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। जांच के बीच JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) की भूमिका भी जांच के केंद्र में है।
TDPL को ठेका देने की प्रक्रिया जांच के घेरे में
CID की जांच में यह पहलू सामने आया है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी TDPL को ठेका देने की प्रक्रिया में नियम-कायदों की अनदेखी के आरोप हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, आरोप है कि इसी के एवज में पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते ने TDPL से लगभग 2 करोड़ रुपये की रिश्वत और कुल सौदे का 20% कमीशन लिया।
ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
21 जुलाई को JPSC कार्यालय में CID की छापेमारी
मामले की जांच में तेजी उस समय आई, जब 21 जुलाई 2026 को CID और रांची पुलिस की संयुक्त टीम ने JPSC मुख्यालय और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के ठिकानों पर छापेमारी की। जांच टीम ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे।
इसी कार्रवाई के कुछ घंटों बाद एल. खियांग्ते ने JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया गया था।
खियांग्ते इससे पहले झारखंड के मुख्य सचिव भी रह चुके हैं और सेवानिवृत्ति के बाद JPSC अध्यक्ष बनाए गए थे। उन्होंने मार्च 2025 में JPSC अध्यक्ष का पद संभाला था।
खियांग्ते के आवास और JPSC चैंबर पर भी छापेमारी
23 जुलाई 2026 को CID ने एल. खियांग्ते के कांके रोड स्थित सरकारी आवास और JPSC कार्यालय में उनके चैंबर की तलाशी ली। यह कार्रवाई 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में हुई थी।
जांच एजेंसी ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, जांच में डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों को भी शामिल किया गया।
पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं कई आरोपी
CID ने इस मामले में इससे पहले JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह तथा मोहम्मद उस्मान, मोहम्मद इबाद और अभय कुमार तिवारी को गिरफ्तार किया था। सभी को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
जांच में परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, डिजिटल डेटा के प्रबंधन और परीक्षा एजेंसी तथा आयोग के अधिकारियों की भूमिका जैसे पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
खियांग्ते से हुई पूछताछ, पासपोर्ट भी जब्त
CID ने बाद में पूर्व JPSC अध्यक्ष को पूछताछ के लिए नोटिस भी जारी किया था। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी ने उनके जवाबों का मिलान पहले गिरफ्तार आरोपियों के बयानों, जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से करने की प्रक्रिया अपनाई।
जांच के दौरान उनका पासपोर्ट जब्त किए जाने और अमेरिका यात्रा से जुड़े खर्चों का विवरण मांगे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई। उस समय उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक CID ने उन्हें जांच में आरोपी घोषित नहीं किया था और पूछताछ को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया था।
14वीं JPSC परीक्षा से शुरू हुआ विवाद
14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और प्रक्रियागत खामियों के आरोप लगाए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंपी।
जांच आगे बढ़ने के साथ छापेमारी और गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हुआ। JPSC ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 को स्थगित किया और जुलाई से सितंबर 2026 के बीच निर्धारित अन्य परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक टाल दिया था।
अब जांच के केंद्र में TDPL और आयोग की भूमिका
पूरे मामले में जांच एजेंसी के सामने मुख्य सवालों में यह शामिल है कि TDPL को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी किन परिस्थितियों में दी गई, परीक्षा से जुड़े डेटा और OMR शीट की प्रक्रिया कैसे संचालित हुई और आयोग तथा आउटसोर्सिंग एजेंसी के अधिकारियों की क्या भूमिका रही।
एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का अगला चरण और महत्वपूर्ण हो गया है। CID की जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
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