Tuesday, September 22

सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा निर्देश: एक महीने में तैयार होगा झारखंड के सभी वन क्षेत्रों का डिजिटल रिकॉर्ड, ‘एक पेड़ लगाएं-5 यूनिट फ्री बिजली पाएं’ योजना को मिलेगा बढ़ावा

​झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, घने जंगलों, वन्यप्राणियों और जैव विविधता से है। इसे अक्षुण्ण रखते हुए राज्य के सतत विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के वन संसाधनों के संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और विकास को लेकर कई कड़े और दूरगामी निर्देश दिए।
​बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह समेत विभाग के तमाम आला अधिकारी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों के वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) जुड़े रहे।

1. एक क्लिक पर दिखेगा पूरा जंगल: एक माह में बनेगा डिजिटल मैप

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्य गठन (साल 2000) के बाद से अब तक के सभी वन क्षेत्रों का टेक्निकल एवं डिजिटल रिकॉर्ड एक महीने के भीतर तैयार किया जाए।
​डिजिटल लेयरिंग: वनों के वास्तविक स्वरूप, संरचना और वर्तमान स्थिति को जानने के लिए डिजिटल मैप की लेयरिंग की जाएगी।
​बदलावों का आकलन: राज्य निर्माण के बाद कहां वनों का विस्तार हुआ, कहां खनन बढ़ा, कहां वनों की कटाई हुई या वन्यजीव अभयारण्यों की सीमाएं बदलीं, इन सबका वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार किया जाएगा ताकि एक क्लिक पर सटीक जानकारी मिल सके।

​2. ‘एक पेड़ लगाएं, पांच यूनिट मुफ्त बिजली पाएं’ योजना पर जोर

शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने और हरित आवरण (Green Cover) को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “पेड़ लगाओ, फ्री बिजली पाओ” का प्रभावी प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया।
​योजना का लाभ: इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में नागरिकों द्वारा एक पेड़ लगाने पर उन्हें 5 यूनिट बिजली निशुल्क प्रदान की जाएगी। शहरों में प्रदूषण कम करने के लिए अकाशिया सहित अन्य छायादार पेड़ लगाने का भी निर्देश दिया गया।

3. उपयोगिता और स्थानीय इको-सिस्टम पर आधारित होगा पौधरोपण

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पौधरोपण केवल कागजों पर संख्या बढ़ाने के लिए नहीं होना चाहिए। अनुपयोगी वृक्ष लगाने का कोई औचित्य नहीं है। पौधरोपण पूरी तरह स्थानीय जरूरतों और आर्थिक उपयोगिता पर केंद्रित होगा:
​जीविकोपार्जन वाले वृक्ष: महुआ, जामुन, करंज, पलाश, कुसुम, बैर और तसर उत्पादन के लिए उपयोगी अर्जुन जैसे वृक्षों का बड़े पैमाने पर रोपण होगा।
​ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल: पलाश, कुसुम और अर्जुन जैसे वृक्षों से राज्य के लाह एवं तसर (रेशम) उद्योग को नई गति मिलेगी। फलदार वृक्षों से ग्रामीणों को पोषण और अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।

4. काजू और बांस (बैम्बू) की व्यावसायिक खेती पर फोकस

ग्रामीणों और किसानों की आय के नए स्रोत सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री ने वन विभाग को बड़े भू-भागों (Land Parcels) की पहचान करने का निर्देश दिया।
​काजू उत्पादन: राज्य में काजू की व्यावसायिक खेती (Cashew Farming) की संभावनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा।
​बांस आधारित स्वरोजगार: बांस (बैम्बू) के सुनियोजित विकास से बांस आधारित उद्योगों और बैम्बू क्राफ्ट को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे पारंपरिक हस्तशिल्प को नया बाजार मिलेगा और ग्रामीण आत्मनिर्भर बनेंगे।

5. वन पट्टा के लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन और मुआवजा

​वन पट्टा: मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि आम नागरिकों और आदिवासियों से जुड़े वन पट्टा के लंबित मामलों का बिना किसी अनावश्यक देरी के निष्पादन किया जाए। पात्र लाभुकों को समय पर वन पट्टा देना सरकार की प्राथमिकता है।
​मुआवजा में तत्परता: जंगली हाथियों के हमले में मृत व्यक्तियों के आश्रितों को मुआवजा देने और क्षतिग्रस्त फसलों व मकानों के भुगतान में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।

​हवाई बीजारोपण (Aerial Seeding): दुर्गम वन क्षेत्रों के विकास के लिए हेलीकॉप्टर के माध्यम से बीज गिराकर (Seed Bombing) हरित क्षेत्र विकसित करने की कार्ययोजना पर काम करने को कहा गया है।

​6. पर्यटन और वन विभाग मिलकर बढ़ाएंगे ‘इको-टूरिज्म’

​झारखंड में इको-टूरिज्म की असीम संभावनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने वन विभाग और पर्यटन विभाग को आपस में बेहतर तालमेल (Coordination) बनाकर एक मास्टर प्लान के साथ आगे बढ़ने को कहा, ताकि प्रकृति को बिना नुकसान पहुंचाए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।

​7. प्रदूषण नियंत्रण और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

​समीक्षा बैठक के दौरान पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों और संस्थाओं पर इन्वायरनमेंटल कंपनसेशन (Environmental Compensation) के तहत कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। साथ ही, प्रदूषण संबंधी शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए ‘जनविश्वास एप’ के प्रभावी संचालन की बात कही।
​मुख्यमंत्री के इन कड़े निर्देशों से स्पष्ट है कि झारखंड सरकार अब वनों के संरक्षण के साथ-साथ उसे राज्य की अर्थव्यवस्था, ग्रामीण रोजगार और शहरी पर्यावरण से जोड़ने के लिए पूरी तरह गंभीर है। सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग और स्थानीय जनता की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि विकास और पर्यावरण का संतुलन बना रहे।

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SURBHI SHIPRA is a news editor, content writer , and graphic designer with experience in digital journalism and online media . she specializes in editing news ,articles, content writing, fact-checking , and creating engaging digital content . Along with editorial work, She designs eye-catching graphic and YouTube thumbnails . She is committed to delivering accurate, informative , and reader- focused content with creativity and professionalism. currently working as a journalist at Jharkhand Digital

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