ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आखिरकार खिताब अपने नाम कर लिया। चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले गए फाइनल में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच मुकाबला ड्रॉ रहा, लेकिन पहली पारी में मिली 372 रन की बड़ी बढ़त ने ईस्ट जोन को चैंपियन बना दिया। टीम ने करीब 13 साल बाद इस प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट की ट्रॉफी अपने नाम की।
इस जीत की कहानी सिर्फ एक बड़ी बढ़त की नहीं है, बल्कि कप्तान ईशान किशन की शानदार बल्लेबाजी, टीम की लंबी बल्लेबाजी और गेंदबाजों के दबाव की भी है। ईस्ट जोन ने फाइनल की पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में साउथ जोन की पूरी टीम 336 रन पर सिमट गई। इस तरह ईस्ट जोन को पहली पारी में 372 रन की निर्णायक बढ़त मिल गई।
ईशान किशन ने अकेले बदल दिया मैच का रुख
ईस्ट जोन की इस जीत में सबसे बड़ा योगदान कप्तान ईशान किशन का रहा। उन्होंने पहली पारी में 334 गेंदों का सामना करते हुए 270 रन की जबरदस्त पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 30 चौके और 7 छक्के निकले। उनकी पारी इतनी लंबी और प्रभावशाली रही कि ईस्ट जोन को विशाल स्कोर तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका उन्हीं की रही।
ईशान ने यहीं रुकने के बजाय दूसरी पारी में भी तेजी से रन बनाए। उन्होंने 80 रन की पारी खेली। इस तरह पूरे फाइनल में उनके बल्ले से कुल 350 रन निकले। यानी एक ही मुकाबले में कप्तान ने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने ईस्ट जोन की खिताबी राह लगभग तय कर दी।
कुमार कुशाग्र ने भी ठोका शतक
ईस्ट जोन की पहली पारी को सिर्फ ईशान किशन ने ही नहीं संभाला। टीम के दूसरे झारखंडी विकेटकीपर-बल्लेबाज कुमार कुशाग्र ने भी शानदार शतक लगाया और 101 रन की पारी खेली। दोनों के बीच महत्वपूर्ण साझेदारी ने साउथ जोन के गेंदबाजों को पूरी तरह दबाव में ला दिया। आखिरकार ईस्ट जोन ने 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया।
साउथ जोन की बल्लेबाजी लड़खड़ाई
708 रन के जवाब में साउथ जोन की शुरुआत और मध्यक्रम ईस्ट जोन के गेंदबाजों के सामने संघर्ष करता नजर आया। टीम 336 रन पर ऑलआउट हो गई। कप्तान तिलक वर्मा 99 रन बनाकर शतक से सिर्फ एक रन दूर रह गए, जबकि देवदत्त पडिक्कल ने 62 रन बनाए। इसके बावजूद साउथ जोन ईस्ट जोन के विशाल स्कोर के आसपास भी नहीं पहुंच सका।
पहली पारी के बाद ही मैच का पलड़ा पूरी तरह ईस्ट जोन की तरफ झुक चुका था। इसके बाद टीम ने दूसरी पारी में भी बल्लेबाजी करते हुए 388/7 पर पारी घोषित की। इस पारी में कूनैन कुरैशी ने नाबाद 116 रन बनाए, जबकि अनुकूल रॉय ने 64 रन का योगदान दिया। ईशान किशन के 80 रन ने भी टीम की स्थिति और मजबूत की।
मैच ड्रॉ, फिर भी ईस्ट जोन की जीत कैसे हुई?
यह फाइनल का सबसे दिलचस्प पहलू रहा। मुकाबला पांचवें दिन ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन दलीप ट्रॉफी के फाइनल में पहली पारी की बढ़त का नियम लागू होने के कारण ईस्ट जोन को विजेता घोषित किया गया। साउथ जोन पहली पारी में 372 रन पीछे रह गया था और वह इस अंतर को खत्म नहीं कर सका।
यानी स्कोरकार्ड पर मुकाबला भले ही ड्रॉ दिखाई दे, लेकिन ट्रॉफी ईस्ट जोन के नाम रही।
13 साल बाद फिर चैंपियन
ईस्ट जोन के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि टीम ने लंबे इंतजार के बाद दलीप ट्रॉफी अपने नाम की है। इस सफलता ने घरेलू क्रिकेट में ईस्ट जोन की वापसी को भी रेखांकित किया है। टीम ने टूर्नामेंट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया और निर्णायक मुकाबले में भी अपनी बल्लेबाजी की ताकत दिखाई।
ईस्ट जोन की टीम में अनुभव और युवा जोश का अच्छा मिश्रण देखने को मिला। ईशान किशन जैसे अनुभवी बल्लेबाज के साथ वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी भी टीम का हिस्सा रहे। वहीं अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी की मौजूदगी ने टीम को अतिरिक्त मजबूती दी।
ईशान के लिए भी बड़ी उपलब्धि
दलीप ट्रॉफी का यह संस्करण ईशान किशन के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी बेहद खास रहा। टूर्नामेंट में उन्होंने कुल 409 रन बनाए और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। फाइनल में 270 रन उनका टूर्नामेंट का सर्वोच्च स्कोर भी रहा।
ईस्ट जोन की यह जीत इसलिए याद रखी जाएगी क्योंकि टीम ने फाइनल में सिर्फ एक खिलाड़ी के दम पर नहीं, बल्कि बड़ी बल्लेबाजी, मजबूत पहली पारी की बढ़त और सामूहिक प्रदर्शन के आधार पर खिताब हासिल किया। ईशान किशन की 350 रन की मैराथन बल्लेबाजी इस जीत की सबसे बड़ी कहानी जरूर बनी, लेकिन 708 रन का टीम स्कोर और 372 रन की पहली पारी की बढ़त ने ट्रॉफी ईस्ट जोन की झोली में डाल दी।
