Friday, September 11

झारखंड में सड़क हादसों और मौतों पर अंकुश लगाने के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी सड़क सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में घोर लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। सड़क सुरक्षा कोष से स्वीकृत योजनाओं पर करीब 11 महीने बीत जाने के बाद भी काम आगे न बढ़ने और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के आदेशों के बावजूद इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के क्रियान्वयन में ढिलाई बरतने पर परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। ​झारखंड सरकार के परिवहन विभाग के सचिव राजीव रंजन  ने परिवहन आयुक्त-सह-सदस्य सचिव (राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति) संजीव कुमार बेसरा को कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) जारी किया है। पत्रांक 1367, दिनांक 10/09/2026 के जरिए भेजे गए इस पत्र में सचिव ने स्पष्ट कहा है कि सदस्य सचिव के रूप में उन्होंने अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन गंभीरता और उत्तरदायित्व के साथ नहीं किया है। विभाग ने उन्हें पत्र प्राप्ति के 3 (तीन) कार्य दिवसों के भीतर 6 प्रमुख बिंदुओं पर साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण देने का अंतिम निर्देश दिया है।

​क्या है पूरा मामला? 11 महीने बाद भी योजनाएं अधर में
​प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित ‘राज्य सड़क सुरक्षा कोष प्रबंधन समिति’ की बैठक में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं और मृत्यु-दर में कमी लाने तथा सड़क सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति दी गई थी।
​हालाँकि, अत्यंत खेद का विषय यह है कि इस बैठक के लगभग 11 माह बीत जाने के बाद भी स्वीकृत योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई और अधिकांश योजनाएं आज भी अधर में लटकी हुई हैं। इसके कारण समिति द्वारा लिए गए फैसलों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं हो सका।

​सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अनदेखी!
​परिवहन सचिव द्वारा जारी पत्र में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर पारित आदेशों (Suo Motu Writ (Civil) No- 09 of 2025 with W.P. (C) No. 1100 of 2025) का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), इलेक्ट्रॉनिक एन्फोर्समेंट और अन्य सड़क सुरक्षा उपायों के शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया था।
​अदालत के सख्त रुख के बावजूद राज्य में स्वीकृत ITMS एवं अन्य सुरक्षा योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रगति न होना बेहद गंभीर और आपत्तिजनक माना गया है।

​पूर्व में दिए गए रिमाइंडर का भी नहीं मिला जवाब
​विभाग की ओर से जारी पत्र में इस बात पर भी गहरी नाराजगी व्यक्त की गई है कि इस संबंध में पूर्व में भी पत्रांक-1185, दिनांक 31/07/2026 के माध्यम से स्थिति का स्पष्टीकरण मांगा गया था। लेकिन निर्धारित अवधि बीत जाने के बाद भी परिवहन आयुक्त द्वारा न तो कोई स्पष्टीकरण दिया गया और न ही प्रयुक्त साक्ष्य उपलब्ध कराए गए।
​निर्देशों के बावजूद उत्तर न देना अत्यंत गंभीर विषय है, जिसके बाद परिवहन सचिव राजीव रंजन ने कड़ा रुख अपनाते हुए नया अल्टीमेटम जारी कर दिया है।

​इन 6 प्रमुख बिंदुओं पर मांगा गया है जवाब
​परिवहन विभाग ने परिवहन आयुक्त-सह-सदस्य सचिव से निम्नलिखित 6 बिंदुओं पर आवश्यक अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा है:
​योजनाओं की वर्तमान स्थिति: 10.10.2025 को स्वीकृत योजनाओं की वर्तमान स्थिति एवं प्रगति का विस्तृत विवरण।
​लंबित रहने का कारण: स्वीकृत योजनाओं के अब तक लंबित रहने के कारणों का स्पष्ट एवं तथ्यात्मक विवरण।

​प्रशासनिक कार्रवाई: उक्त योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में स्तर से की गई प्रशासनिक कार्रवाई, अनुश्रवण (Monitoring) एवं समन्वय की विस्तृत जानकारी।

​एजेंसियों के साथ पत्राचार: संबंधित विभागों व कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में की गई कार्रवाई एवं पत्राचार का ब्योरा।

विस्तृत कार्ययोजना: सभी स्वीकृत योजनाओं के शीघ्र एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निर्धारित समय-सीमा के साथ विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan)।

​पूर्व में जवाब न देने की वजह: पूर्व में मांगे गए स्पष्टीकरण का समय पर उत्तर न देने के कारणों का स्पष्ट उल्लेख करते हुए अपना स्पष्टीकरण।

मुख्य सचिव को भी भेजी गई प्रतिलिपि
​इस सख्त प्रशासनिक कदम की प्रतिलिपि (Copy) मुख्य सचिव कार्यालय को भी सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित कर दी गई है। ​राज्य में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों के बीच सड़क सुरक्षा योजनाओं में इस तरह की हीला-हवाली से शासन-प्रशासन की साख पर सवाल खड़े हो रहे थे। अब 3 दिनों के भीतर आने वाले जवाब और विभाग द्वारा की जाने वाली संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे की नजरें टिकी हुई हैं

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