Friday, September 11

मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा के नामों को मिली मंजूरी — केंद्र सरकार की अंतिम स्वीकृति का इंतजार

झारखंड उच्च न्यायालय में लंबे समय से खाली पड़े न्यायाधीशों के पदों को भरने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 10 सितंबर 2026 को हुई अपनी बैठक में राज्य के तीन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों — मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा — को झारखंड हाईकोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आधिकारिक वक्तव्य के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम के वरिष्ठ सदस्यों ने गहन विचार-विमर्श के बाद इन तीनों अधिकारियों के न्यायिक अनुभव, कार्यक्षमता और सेवा-निष्ठा को आधार बनाकर यह सिफारिश की। तीनों अधिकारी लंबे समय से अधीनस्थ न्यायपालिका में सेवारत रहे हैं और निचली अदालतों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक व न्यायिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

अब आगे क्या

कॉलेजियम की इस सिफारिश को औपचारिक मंजूरी के लिए अब केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय भेजा जाएगा। राष्ट्रपति भवन से अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही इन तीनों की नियुक्ति प्रभावी होगी, जिसके बाद झारखंड हाईकोर्ट में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह शपथ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिलाई जाएगी।

लंबित मामलों पर पड़ेगा असर

झारखंड हाईकोर्ट में जजों के कई पद रिक्त होने की वजह से मुकदमों का बोझ लगातार बढ़ रहा था। इन तीन नई नियुक्तियों से अदालत में जजों की संख्या बढ़ेगी, जिसका सीधा असर लंबित दीवानी और फौजदारी मामलों के त्वरित निष्पादन पर पड़ने की उम्मीद है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इससे वादियों को न्याय मिलने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

कानूनी हलकों में स्वागत

कॉलेजियम के इस फैसले का अधिवक्ताओं और विधि विशेषज्ञों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधीनस्थ न्यायपालिका से आने वाले इन अनुभवी अधिकारियों के पास जमीनी स्तर के मामलों की गहरी समझ है, जो हाईकोर्ट की कार्यवाही और आम वादियों — दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।

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