Friday, October 23

चतरा/हजारीबाग। बैगनतरी नदी से कथित अवैध बालू खनन का मामला सामने आए, वीडियो वायरल हो और मशीनें जब्त भी हो जाएं, लेकिन प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई की जिम्मेदारी को लेकर असमंजस बना रहे, तो सवाल उठना लाजिमी है। चतरा जिले के टंडवा थाना क्षेत्र के उड़सू स्थित बैगनतरी नदी में कथित अवैध बालू खनन का मामला अब चतरा जिले के टंडवा और हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना क्षेत्र के बीच उलझता नजर आ रहा है। मामले में पोकलेन मशीन और बोलेरो जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है, लेकिन प्राथमिकी दर्ज करने की स्थिति और आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्टता नहीं है।

वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आया प्रशासन

बैगनतरी नदी में पोकलेन मशीन लगाकर कथित तौर पर बालू का उत्खनन किए जाने और हाइवा वाहनों से उसकी ढुलाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद मौके पर इस्तेमाल की जा रही पोकलेन मशीन और एक बोलेरो को जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नदी से निकाली जा रही बालू को भारी वाहनों के माध्यम से हजारीबाग की ओर ले जाया जा रहा था। ग्रामीणों ने इस गतिविधि में चंद्रगुप्त कोल परियोजना में कार्यरत एमडीओ कंपनी सुशी इंफ्रा से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, कंपनी या उसके प्रतिनिधियों की संलिप्तता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

टंडवा और केरेडारी पुलिस के बीच अधिकार क्षेत्र का सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल प्राथमिकी और जांच की जिम्मेदारी को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टंडवा पुलिस का कहना है कि जब्त वाहनों को हजारीबाग जिले के केरेडारी थाना प्रशासन को सौंपा जाएगा। दूसरी ओर, केरेडारी क्षेत्र के पगार ओपी प्रभारी दिनेश मंडल के मुताबिक, संबंधित स्थान टंडवा थाना क्षेत्र में आता है और कार्रवाई टंडवा पुलिस को करनी चाहिए।

केरेडारी पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि इससे पहले उक्त स्थान से जुड़े मामलों में टंडवा पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बयानों के बीच क्षेत्राधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है।

मशीनें जब्त, लेकिन प्राथमिकी पर स्पष्टता नहीं

अवैध खनन की आशंका के बीच मशीन और वाहन जब्त किए जाने के बावजूद मामले में प्राथमिकी दर्ज होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर कार्रवाई की गति और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अवैध खनन में छोटे वाहन या ट्रैक्टर पकड़े जाते, तो तत्काल कार्रवाई की जाती। ऐसे में भारी मशीनों और हाइवा से जुड़े इस मामले में भी समान रूप से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी द्वारा जानबूझकर कार्रवाई से बचने की बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अंचल अधिकारी ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

मामले को लेकर टंडवा के अंचल अधिकारी गौरव कुमार ने जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। जांच के जरिए यह स्पष्ट होना है कि नदी में खनन की अनुमति थी या नहीं, बालू का परिवहन किन वाहनों से किया जा रहा था और इस गतिविधि में किन लोगों की भूमिका थी।

निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग

बैगनतरी नदी में कथित अवैध खनन के मामले ने खनन की निगरानी, परिवहन और पुलिस की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि खनन में इस्तेमाल मशीनों, वाहनों के संचालकों, परिवहन से जुड़े लोगों और यदि किसी स्तर पर संरक्षण दिया गया हो, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए।

अब अहम सवाल यह है कि जब्त मशीन और वाहन किस थाने की जिम्मेदारी में रहेंगे, प्राथमिकी कौन दर्ज करेगा और कथित अवैध खनन के पीछे शामिल लोगों की पहचान कर कब तक कार्रवाई होगी। इन सवालों पर संबंधित पुलिस अधिकारियों की स्पष्ट स्थिति सामने आने के बाद ही मामले की आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी।

 

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