रांची। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री ने राज्य की वर्तमान उपलब्धियों के साथ-साथ अगले 25 वर्षों के लिए विकास की व्यापक तस्वीर सामने रखी। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता के 80वें वर्ष और झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने को राज्य के लिए नए संकल्प और नई दिशा तय करने का अवसर बताया। उन्होंने ऐसा झारखंड बनाने की बात कही, जहां विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, किसान समृद्ध हों, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने के साथ नेतृत्वकर्ता बनें, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसर मिलें तथा प्राकृतिक संसाधनों का लाभ राज्य के लोगों को मिले।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देकर की। उन्होंने झारखंड के जननायकों भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, तिलका मांझी, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर और शेख भिखारी सहित अन्य अमर शहीदों को नमन किया। उन्होंने झारखंड आंदोलन और जल, जंगल, जमीन तथा आदिवासी अस्मिता के संघर्ष में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के योगदान को भी याद किया।
स्वतंत्रता का अर्थ सिर्फ राजनीतिक आजादी नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ तब पूरा होगा, जब हर बच्चे को अच्छी शिक्षा, हर युवा को सम्मानजनक रोजगार, हर किसान को समृद्धि और हर महिला को आत्मनिर्भरता का अवसर मिले। उन्होंने समान अवसर, समान सम्मान और न्यायपूर्ण जीवन को स्वतंत्रता की व्यापक भावना से जोड़ा।
उन्होंने झारखंड की पारंपरिक जीवन-दृष्टि को राज्य की ताकत बताते हुए कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलित जीवन जीने की सीख आज के दौर में भी महत्वपूर्ण है। जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के समाधान खोज रही है, तब झारखंड की पारंपरिक सोच इन विषयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मुख्यमंत्री ने ऐसे झारखंड की कल्पना रखी जहां आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं, साहित्य, लोककला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को भी समान महत्व मिले। लाह, तसर, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखकर वैल्यू एडिशन, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई।
युवाओं और परीक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री के संबोधन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य के युवाओं और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे हैं और उनके माता-पिता भी अपनी क्षमता से अधिक प्रयास कर उन्हें पढ़ा रहे हैं। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह का संदेह केवल एक परीक्षा को प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरी पीढ़ी के विश्वास को प्रभावित करता है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मेहनत को किसी माफिया, भ्रष्ट तंत्र या अनियमितता के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़ी शिकायतों और अनियमितताओं की जांच निष्पक्ष तरीके से होगी और दोष साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने बिना प्रमाण किसी को दोषी ठहराने से बचने की बात भी कही।
उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दोषियों पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए पूरी परीक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है। सरकार की प्रस्तावित दिशा में समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पारदर्शी और तकनीक-सुरक्षित परीक्षा प्रणाली, उत्तर-कुंजी एवं संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध कराने तथा परीक्षा प्रक्रिया में बहु-स्तरीय जवाबदेही जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया।
‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ अभियान
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की भागीदारी को परीक्षा सुधार की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने ‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ अभियान शुरू किए जाने की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों से सुझाव देने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों के सुझावों का विशेषज्ञों के साथ अध्ययन किया जाएगा और संवैधानिक तथा नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप संभव सुझावों को लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। उनका संदेश था कि ऐसी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए, जिसके निर्माण में विद्यार्थियों की भी भागीदारी हो।
सरकारी नौकरी के साथ रोजगार के दूसरे रास्तों पर जोर
मुख्यमंत्री ने रोजगार को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा कि लक्ष्य सिर्फ सरकारी रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि रोजगार के व्यापक अवसर तैयार करना है। उद्योग, MSME, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने की दिशा में काम करने की बात कही गई।
उन्होंने कहा कि भर्ती एजेंसियों के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को अवसर देने के साथ-साथ भर्ती व्यवस्था में उनका विश्वास मजबूत करना है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपनी मेहनत पर विश्वास बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनके सपनों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करने का प्रयास होगा जिस पर अभ्यर्थियों को भरोसा और समाज को विश्वास हो।
किसान को ‘कृषि-उद्यमी’ बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने किसानों को झारखंड की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव बताते हुए कृषि क्षेत्र में विविधता और आय बढ़ाने पर जोर दिया। उनके अनुसार सरकार सिंचाई, बीज, समर्थन मूल्य, कृषि यंत्रीकरण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
बिरसा हरित ग्राम योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लगभग 2.45 लाख एकड़ में वृक्षारोपण किया गया है और करीब 3 लाख परिवारों को आजीविका के नए माध्यमों से जोड़ने का प्रयास हुआ है। उन्होंने बताया कि इसके तहत उत्पादित आम का विदेशों में भी निर्यात किया गया है।
आने वाले वर्षों के लिए सरकार की सोच केवल धान की खेती तक सीमित न रहकर किसानों को कृषि-उद्यमी बनाने की है। फल, सब्जी, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, लाह, तसर, मिलेट, औषधीय पौधों और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की बात कही गई।
MSME और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य की आर्थिक शक्ति केवल बड़े उद्योगों से नहीं बनती, बल्कि छोटे उद्यमियों, कारीगरों, बुनकरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और हस्तशिल्पियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है।
भाषण में झारखंड के MSME क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का उल्लेख करते हुए स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा पर जोर दिया गया। सरकार का लक्ष्य स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना, जिलों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योग विकसित करना तथा स्टार्टअप और नवाचार को प्रोत्साहित करना बताया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोशिश ऐसी औद्योगिक व्यवस्था बनाने की है, जिसमें युवाओं को अपने ही जिले में सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिल सकें।
निवेश और रोजगार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहल
मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग जगत, निवेशकों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ उद्योग, पर्यटन, IT, AI, आधारभूत संरचना और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश एवं नवाचार को लेकर विचार-विमर्श हुआ।
भाषण में चार प्रमुख कॉरपोरेट समूहों के साथ निवेश प्रस्तावों से जुड़े MoUs का भी उल्लेख किया गया और इससे राज्य में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई।
महिला सशक्तिकरण को लाभार्थी से नेतृत्वकर्ता तक ले जाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में सरकार की योजनाओं का उल्लेख किया।
‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं की आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता को बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण की अगली दिशा को और व्यापक बताते हुए कहा कि महिलाएं केवल योजनाओं की लाभार्थी न रहें, बल्कि किसान उत्पादक संगठनों की नेता, उद्यमी, निर्यातक और डिजिटल अर्थव्यवस्था की सक्रिय सहभागी बनें।
सखी मंडल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी के लिए सखी मंडलों को महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए मुख्यमंत्री ने इनके विस्तार और वित्तीय सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर स्वावलंबन और आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।
गुमला के ‘जोहार रागी मिशन’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि रागी और बाजरा प्रोसेसिंग से बड़ी संख्या में किसानों और महिला शेयरधारकों की आजीविका जुड़ी है। इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला नेतृत्व के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
स्वास्थ्य व्यवस्था को गांव तक मजबूत करने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य को केवल बीमारी के इलाज तक सीमित न रखते हुए जीवन की गुणवत्ता का आधार बताया। सरकार का लक्ष्य शहर और गांव दोनों के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना बताया गया।
आधुनिक अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग शिक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, टेलीमेडिसिन और प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई। पंचायत स्तर पर दवा दुकानों की व्यवस्था के साथ-साथ सभी पंचायतों में समर्पित एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने के संकल्प का भी उल्लेख किया गया।
भाषण के अनुसार राज्य में सुपर स्पेशियलिटी RIMS-2 के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और धनबाद में छह नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण की कार्रवाई का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों तक स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा पर जोर दिया गया।
अगले 25 वर्षों का झारखंड: विकास के साथ पहचान और प्रकृति
भाषण के अंतिम हिस्से में मुख्यमंत्री ने अगले 25 वर्षों के झारखंड की तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और झारखंडी अस्मिता तथा आधुनिक प्रगति साथ-साथ आगे बढ़े।
उनके विजन में ऐसा राज्य शामिल है जहां किसान सम्मान और समृद्धि के साथ जीवन जीएं, महिलाएं विकास की सहभागी के साथ नेतृत्वकर्ता बनें, बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और प्राकृतिक संसाधनों का लाभ सबसे पहले झारखंड के लोगों को मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि लोगों के लिए पैदा होने वाले ऊंचे अवसरों से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रगति केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए।
युवाओं पर भरोसा, भविष्य के झारखंड का आधार
अपने संबोधन के समापन में मुख्यमंत्री ने किसानों, माताओं-बहनों और युवाओं पर विश्वास जताया। उन्होंने युवाओं को आने वाले झारखंड की नई पहचान लिखने वाली शक्ति बताया।
उन्होंने ऐसे झारखंड के निर्माण का संकल्प दोहराया जो समृद्ध भी हो और संवेदनशील भी, आधुनिक भी हो और अपनी जड़ों से जुड़ा भी, विकासशील भी हो और न्यायपूर्ण भी।
स्वतंत्रता दिवस के इस संबोधन में सरकार की प्राथमिकताओं का व्यापक खाका सामने आया-युवा और परीक्षा सुधार से लेकर रोजगार, कृषि, MSME, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य तक। साथ ही भाषण का केंद्रीय संदेश यह रहा कि झारखंड के अगले 25 वर्षों की विकास यात्रा केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित न होकर मानव विकास, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक पहचान और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर आधारित हो।


