दुमका। नवजात को ठंड से बचाने और कमरे में गर्माहट बनाए रखने की एक कोशिश दुमका के एक परिवार के लिए दर्दनाक हादसे में बदल गई। रात में जलाई गई अंगीठी का धुआं बंद कमरे में भरता रहा और परिवार के लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। सुबह जब काफी देर तक घर का दरवाजा नहीं खुला तो परिजनों और पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई। दरवाजा खोलकर अंदर पहुंचे लोगों के सामने जो दृश्य था, उसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। कमरे में मां और उसकी तीनों बच्चियां बेहोश पड़ी थीं। आनन-फानन में सभी को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन छह वर्षीय निक्की कुमारी को बचाया नहीं जा सका। वहीं, मां और एक अन्य बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। 11 दिन की नवजात बच्ची की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
नवजात की गर्माहट के लिए जलाई थी अंगीठी
घटना दुमका मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बहराबांक गांव की है। जानकारी के अनुसार, रीना देवी की 11 दिन पहले ही बच्ची हुई थी। ठंड से नवजात को बचाने और कमरे में गर्माहट बनाए रखने के उद्देश्य से रीना देवी ने रात में अंगीठी जलाई थी। इसके बाद वह अपनी तीनों बच्चियों के साथ कमरे में सो गई। परिवार को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि रात में जलाई गई अंगीठी कुछ ही घंटों में जानलेवा साबित हो सकती है।
बताया जाता है कि कमरे के दरवाजे और खिड़कियां बंद थीं। ऐसे में अंगीठी से निकलने वाला धुआं बाहर नहीं निकल सका और धीरे-धीरे पूरे कमरे में फैलता चला गया। रातभर धुएं के बीच सो रहे परिवार के सदस्य बेहोश हो गए।
सुबह दरवाजा नहीं खुला तो पड़ोसियों को हुई चिंता
सुबह काफी समय बीत जाने के बाद भी जब कमरे का दरवाजा नहीं खुला तो परिवार के दूसरे सदस्यों को संदेह हुआ। घर में मौजूद अन्य दो बेटियों ने भी दरवाजा खटखटाया और अंदर सो रही मां व बहनों को आवाज लगाई। काफी देर तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने पर दोनों बच्चियां घबरा गईं। इसके बाद उन्होंने आसपास के लोगों को बुलाया।
पड़ोसियों को भी किसी अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद परिवार के चाचा राजकुमार को सूचना दी गई। राजकुमार ने तत्काल अपने भाई और बच्चियों के पिता प्रकाश सिंह को फोन कर घटना की जानकारी दी। प्रकाश सिंह गांव से कुछ किलोमीटर दूर एक लाइन होटल चलाते हैं और रात में वहीं रहते थे।
दरवाजा खुलते ही बेहोश मिले सभी लोग
सूचना मिलने के बाद परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। कमरे का दरवाजा खोलने की कोशिश की गई। दरवाजा नहीं खुलने पर उसे तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। कमरे के भीतर रीना देवी और उनकी तीनों बच्चियां बेहोशी की हालत में पड़ी थीं। कमरे में अंगीठी भी जली हुई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों और परिजनों ने बिना देर किए सभी को बाहर निकाला और इलाज के लिए दुमका के फूलो-झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया।
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने छह वर्षीय निक्की कुमारी को मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में कुछ दिन पहले नवजात के आगमन से खुशियां आई थीं, वहां अचानक मातम पसर गया।
मां और दूसरी बच्ची की हालत गंभीर
इस घटना में रीना देवी और उनकी एक अन्य बच्ची रूपाली कुमारी की हालत गंभीर बताई जा रही है। दोनों को अस्पताल में भर्ती कर चिकित्सकों की निगरानी में इलाज किया जा रहा है। वहीं, 11 दिन की नवजात बच्ची की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है। हादसे के बाद परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी घटना को लेकर शोक और चिंता का माहौल है।
सर्दी में बंद कमरे में अंगीठी जलाना हो सकता है जानलेवा
यह घटना एक बार फिर ठंड के मौसम में अंगीठी और कोयले के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चेतावनी देती है। बंद कमरे में अंगीठी जलाने से निकलने वाली जहरीली गैस, खासकर कार्बन मोनोऑक्साइड, जमा हो सकती है। यह गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसका पता लगाना मुश्किल है। इसके संपर्क में आने से व्यक्ति को सिरदर्द, चक्कर, बेहोशी और गंभीर स्थिति में जान का खतरा हो सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि सोते समय बंद कमरे में अंगीठी, कोयला या जलने वाले अन्य ईंधन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना जरूरी है। दुमका की यह घटना बताती है कि ठंड से बचाव के लिए बरती गई एक छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।
