रांची। राजधानी रांची स्थित रिनपास (RINPAS) में स्थायी निदेशक की नियुक्ति और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। संस्थान में स्थायी निदेशक की नियुक्ति समेत आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के विरोध में धरना-प्रदर्शन शुरू किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर जल्द ठोस निर्णय लेने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि रिनपास जैसे महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में प्रशासनिक व्यवस्था का प्रभावी और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक लंबे समय से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं होने से संस्थान के प्रशासनिक कामकाज को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी के साथ आउटसोर्सिंग के जरिए कराए जा रहे कार्यों और एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी जांच की मांग उठाई गई है।
स्थायी निदेशक की नियुक्ति बनी मुख्य मांग
धरने पर बैठे लोगों की प्रमुख मांग रिनपास में स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि लंबे समय से संस्थान को स्थायी नेतृत्व नहीं मिल पाया है, जिसका असर प्रशासनिक निर्णयों और संस्थान के संचालन पर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थान में प्रशासनिक फैसलों में स्पष्टता और जवाबदेही जरूरी है। ऐसे में स्थायी निदेशक की नियुक्ति को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और नियुक्ति की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।
हालांकि, स्थायी निदेशक के अभाव का संस्थान के कामकाज पर कितना प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ा है, इसे लेकर आधिकारिक स्तर से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
आउटसोर्सिंग एजेंसियों की जांच की मांग
धरने का दूसरा प्रमुख मुद्दा रिनपास में चल रही आउटसोर्सिंग व्यवस्था है। प्रदर्शनकारियों ने कुछ आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संस्थान में आउटसोर्सिंग से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली, व्यवस्था और उससे जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग की है।
उनका आरोप है कि यदि कहीं नियमों की अनदेखी या वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता हुई है, तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान होने के कारण बढ़ी जिम्मेदारी
रिनपास झारखंड का प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान है, जहां राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे संस्थान में प्रशासनिक व्यवस्था का सीधा संबंध मरीजों, उनके परिजनों और कर्मचारियों से जुड़ी व्यवस्थाओं से होता है।
प्रदर्शनकारियों ने इसी बात को आधार बनाते हुए कहा कि संस्थान में प्रशासनिक स्तर पर स्थायित्व और पारदर्शिता जरूरी है। उनका कहना है कि संस्थान की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें मरीजों को मिलने वाली सेवाओं और कर्मचारियों से जुड़े प्रशासनिक मामलों में किसी तरह की अस्पष्टता न रहे।
सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग
धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने स्थायी निदेशक की नियुक्ति के साथ आउटसोर्सिंग व्यवस्था की जांच कराने और यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग दोहराई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य रिनपास की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराना है। इसके लिए उन्होंने सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी
धरने पर बैठे लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में रिनपास का यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है।
फिलहाल प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सरकार या संबंधित विभाग की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि स्थायी निदेशक की नियुक्ति और आउटसोर्सिंग व्यवस्था से जुड़े आरोपों पर विभाग क्या कदम उठाता है।
